
कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक हुए ताजिए; प्रशासनिक व्यवस्था रही पूरी तरह चाक-चौबंद
रक्सौल।(Vor desk)। भारत-नेपाल सीमा से सटे शहर रक्सौल में शनिवार को मुहर्रम का ताजिया जुलूस धार्मिक आस्था, शहादत की याद और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करते हुए शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। शहर के विभिन्न मोहल्लों से पारंपरिक ताजिया, अलम और झंडों के साथ निकले जुलूस निर्धारित मार्गों से होते हुए कर्बला पहुंचे, जहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
मुहर्रम के अवसर पर पूरा शहर अकीदत, भाईचारे और सामाजिक समरसता के रंग में रंगा नजर आया। बड़ी संख्या में अकीदतमंद तिरंगा लेकर जुलूस में शामिल हुए और देश की एकता, अखंडता एवं आपसी सौहार्द का संदेश दिया।

इमाम हुसैन की शहादत को किया गया याद
मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है। इसकी दसवीं तारीख यानी आशूरा के दिन कर्बला की जंग में पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद किया जाता है। इसी बलिदान की स्मृति में ताजिया जुलूस निकाला जाता है, जिसमें लोग मातम कर इंसाफ, सत्य और कुर्बानी की उस महान परंपरा को याद करते हैं।

पारंपरिक युद्धक कलाओं का हुआ प्रदर्शन
ताजिया जुलूस में पारंपरिक ताजिया, अलम और धार्मिक झंडों के साथ युवाओं ने लाठी, तलवार और अन्य पारंपरिक युद्धक कलाओं का प्रदर्शन कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। जुलूस के दौरान अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया।
सबील और सेवा शिविरों में मिली राहत
जुलूस मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर सबील लगाकर शरबत और ठंडे पानी का वितरण किया गया। सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए आपसी सौहार्द का संदेश दिया। भीषण गर्मी को देखते हुए सेवा शिविर और फर्स्ट एड कैंप लगाए गए, जहां मेडिकल टीमों ने जरूरतमंद लोगों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया।

गंगा-जमुनी तहजीब की बनी मिसाल
इस वर्ष का मुहर्रम जुलूस रक्सौल की साझा सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरत तस्वीर बनकर सामने आया। मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोगों ने भी जुलूस में भाग लेकर आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का परिचय दिया। कई स्थानों पर युवाओं ने तिरंगा लहराकर देशभक्ति और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।
पूरी तरह मुस्तैद रहा प्रशासन
मुहर्रम को लेकर बिहार पुलिस और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क और सक्रिय रहा। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल, दंडाधिकारी, महिला पुलिसकर्मियों और क्विक रिस्पांस टीम की तैनाती की गई थी। प्रमुख चौक-चौराहों और जुलूस मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से निगरानी रखी गई। नियंत्रण कक्षों से पूरे आयोजन पर लगातार नजर रखी गई।
रक्सौल अनुमंडल के एसडीएम मनीष कुमार और एसडीपीओ मनीष आनंद स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की मॉनिटरिंग कर रहे थे। प्रशासनिक सतर्कता और स्थानीय लोगों के सहयोग से पूरा आयोजन बिना किसी अप्रिय घटना के शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
अमन, भाईचारे और खुशहाली की मांगी गई दुआ
मुहर्रम के अवसर पर विभिन्न जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और सभी धर्मों के लोगों ने जुलूस में शामिल होकर गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। अकीदतमंदों ने देश और प्रदेश में अमन, शांति और खुशहाली की दुआ मांगी।
रक्सौल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह सीमावर्ती शहर केवल व्यापार और सीमा का केंद्र नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की मजबूत परंपरा का भी प्रतीक है।
