Monday, June 22

रक्सौल स्टेशन पर बड़ा हादसा: लापरवाही की छत गिरी, मौत के साए में सफर करने को मजबूर यात्री

रक्सौल।(Vor desk)।
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रक्सौल रेलवे स्टेशन पर चल रहा पुनर्विकास कार्य रविवार को एक बड़े हादसे का सबब बनते-बनते रह गया। विकास की इस रफ्तार के बीच सुरक्षा मानकों को ताक पर रखने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। पुराने स्टेशन भवन को ध्वस्त करने के दौरान प्लेटफॉर्म संख्या-1 पर भवन का एक हिस्सा और भारी-भरकम छत अचानक भरभराकर नीचे गिर गई।
जिस वक्त यह मलबा गिरा, उस समय प्लेटफॉर्म पर दर्जनों यात्री मौजूद थे। अचानक हुई इस भयावह घटना से स्टेशन परिसर में चीख-पुकार मच गई और कुछ देर के लिए स्थिति बेहद अनियंत्रित हो गई।

मौत को छूकर निकले यात्री: प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रविवार को अचानक एक जोरदार धमाके जैसी आवाज हुई और देखते ही देखते छत का एक बड़ा हिस्सा मलबे के साथ नीचे आ गिरा। मलबे को अपनी ओर गिरता देख प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों में भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर इधर-उधर भागने लगे।

राहत की बात: इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी राहत यह रही कि कोई भी यात्री या रेलकर्मी इसकी चपेट में नहीं आया। हालांकि, चश्मदीदों का कहना है कि यह महज एक इत्तेफाक था, वरना लापरवाही ने एक बड़े हादसे की पूरी पटकथा लिख दी थी।

सुरक्षा मानकों की धज्जियां: यात्रियों की जान से खिलवाड़

इस घटना ने सीधे तौर पर रेलवे और निर्माण एजेंसी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां इतना संवेदनशील और भारी निर्माण कार्य चल रहा था, वहां सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम भी नदारद थे:

  • बैरिकेडिंग का अभाव: कार्यस्थल को सुरक्षित रूप से घेरने के लिए कोई पुख्ता बैरिकेडिंग नहीं की गई थी।
  • संकेतकों की कमी: यात्रियों को सचेत करने के लिए न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था और न ही सुरक्षा संकेतक मौजूद थे।
  • प्रोटोकॉल का उल्लंघन: रेलवे के कड़े सुरक्षा नियमों के मुताबिक, ऐसे ध्वस्तीकरण कार्यों के दौरान प्रभावित क्षेत्र को पूरी तरह खाली कराना और ‘सुरक्षा जाल’ (Safety Net) लगाना अनिवार्य होता है, जिसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

अधिकारियों के गैर-जिम्मेदाराना बयान: ‘हमें तो खबर ही नहीं’

हादसे के बाद जब प्रशासनिक जवाबदेही की बात आई, तो अधिकारियों के बयानों ने व्यवस्था की संवेदनशीलता को और उजागर कर दिया:

  • अजय कुमार (स्टेशन अधीक्षक): उन्होंने मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्हें इस घटना की तत्काल जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जानकारी लेकर संबंधित संवेदक (ठेकेदार) से पूछताछ की जाएगी।
  • श्रवण कुमार (रेलवे IOW): इन्होंने भी छत गिरने की सूचना से इनकार किया, लेकिन बाद में कहा कि मामले की जांच की जाएगी और भविष्य में सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

खतरे की घंटी: स्थानीय लोगों ने जताई बड़ी अनहोनी की आशंका

इस घटना के बाद रक्सौल के स्थानीय नागरिकों और दैनिक यात्रियों में भारी आक्रोश है। लोगों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि पुनर्विकास के नाम पर यात्रियों की जान जोखिम में डालना बंद किया जाए।
यदि निर्माण और ध्वस्तीकरण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को तुरंत कड़ा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में रक्सौल स्टेशन पर किसी बड़े जानमाल के नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता। विकास का स्वागत है, लेकिन यात्रियों की ‘बलि’ देकर नहीं।

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