Sunday, June 21

33ए रेलवे फाटक के केबिन से डीएसपी तक का सफर: 12 घंटे की ड्यूटी, नींद से समझौता और पहले ही प्रयास में BPSC में 72वीं रैंक

रक्सौल।(Vor desk)। रक्सौल के व्यस्त मेन रोड स्थित रेलवे फाटक संख्या-33ए पर दिन-रात ट्रेनों की आवाजाही के बीच ड्यूटी निभाने वाले गेटमैन राजू कुमार ने संघर्ष, अनुशासन और आत्मविश्वास की बदौलत एक नई मिसाल कायम की है। रेलवे में ग्रुप-डी कर्मचारी के रूप में कार्यरत राजू कुमार ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) परीक्षा में पहले ही प्रयास में 72वीं रैंक हासिल कर पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) पद के लिए चयनित होकर सबको चौंका दिया है।

मूल रूप से बेगूसराय जिला के खोदाबंद प्रखंड के मल मल्ला गांव निवासी राजू कुमार का जीवन बचपन से ही संघर्षों से भरा रहा। महज 12 वर्ष की उम्र में उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। करीब पांच वर्ष पूर्व उन्हें रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी मिली और उनकी तैनाती रक्सौल के सबसे व्यस्त रेलवे फाटक संख्या-33ए पर गेटमैन के रूप में हुई।

12 घंटे की कठिन ड्यूटी के बावजूद उन्होंने अपने सपनों से समझौता नहीं किया। महंगी कोचिंग से दूर रहकर उन्होंने पूरी तैयारी सेल्फ स्टडी के माध्यम से की। दिनभर की थकान के बाद रात के समय पढ़ाई कर उन्होंने पहले ही प्रयास में बीपीएससी की कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की।

राजू कुमार की भाभी रूबी पहले से ही बिहार पुलिस में दारोगा (सब-इंस्पेक्टर) के पद पर कार्यरत हैं। अब राजू कुमार भी पुलिस विभाग में एक अधिकारी के रूप में नई जिम्मेदारी संभालेंगे।राजू के बड़े भाई राजेश कुमार सुमन,जो एनवायरमेंट एंड क्लाइमेट चेंज पर काम करते है,ने इस सफलता पर कहा कि राजू ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल कर परिवार का नाम रौशन किया है।

उनकी इस उपलब्धि से रक्सौल के रेलकर्मियों और स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है। रेलवे फाटक के छोटे से केबिन से शुरू हुआ उनका सफर अब डीएसपी की कुर्सी तक पहुंच गया है, जो मेहनत और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक कहानी बन गया है।

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