
रक्सौल।(Vor desk)।बिहार के उच्च शिक्षा जगत की दो प्रमुख हस्तियों—बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं प्रख्यात शिक्षाविद प्रो. (डॉ.) गिरीश कुमार चौधरी तथा पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना के कुलपति प्रो. (डॉ.) उपेंद्र प्रसाद सिंह—का रक्सौल आगमन पर भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। दोनों शिक्षाविद देवाधिदेव महादेव पशुपतिनाथ के दर्शन हेतु तीर्थ यात्रा पर रक्सौल पहुंचे थे।
भारतीय कस्टम कार्यालय के समीप आयोजित स्वागत समारोह में भारती फाउंडेशन के निदेशक प्रो. मनीष दुबे तथा केसीटीसी कॉलेज, रक्सौल के पूर्व जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं शिक्षाविद प्रो. (डॉ.) चन्द्रमा सिंह के नेतृत्व में दोनों अतिथियों को दुशाला ओढ़ाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर शिक्षा, शोध और उच्च शिक्षण संस्थानों में पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा हाल के वर्षों में किए गए कार्यों की सराहना करते हुए इसे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया।
प्रो. मनीष दुबे ने कहा कि प्रो. गिरीश कुमार चौधरी के नेतृत्व में विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने निष्पक्षता, पारदर्शिता और योग्यता आधारित चयन की नई मिसाल स्थापित की है। उन्होंने कहा कि आयोग ने बिना किसी भेदभाव के योग्य अभ्यर्थियों को अवसर प्रदान कर पूरे देश में एक सकारात्मक संदेश दिया है।
वहीं प्रो. (डॉ.) चन्द्रमा सिंह ने कहा कि आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक अवसर पहुंचाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि रिक्शाचालक, पानी पिलाने वाले, दरबान तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली युवाओं का असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे सम्मानित पदों पर चयन होना सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना को मजबूत करता है।
गौरतलब है कि प्रो. (डॉ.) गिरीश कुमार चौधरी के नेतृत्व में बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा अब तक राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों के लिए लगभग चार हजार असिस्टेंट प्रोफेसरों तथा करीब ढाई सौ प्राचार्यों (प्रिंसिपलों) की नियुक्ति की जा चुकी है, जिसे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
समारोह में संतोष छात्रवंशी, नीरज कुशवाहा, हरि चौरसिया, राजन कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने दोनों शिक्षाविदों के शैक्षणिक योगदान और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में उनकी भूमिका की सराहना की।
