
साइबर ठगी आशंका को ले कर पुलिस और साइबर सेल को दी गई सूचना
रक्सौल।(Vor desk)।डिजिटल और सूचना तकनीक के इस दौर में साइबर अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका ताजा उदाहरण सीमावर्ती क्षेत्र रक्सौल में देखने को मिला है। यहाँ साइबर ठगों ने आम लोगों को छोड़िए, सीधे जनप्रतिनिधि को ही अपना निशाना बना लिया है। रक्सौल के भाजपा विधायक सह कारा सुधार समिति सदस्य प्रमोद कुमार सिन्हा का व्हाट्सएप अकाउंट हैक होने का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना की भनक लगते ही पूरे क्षेत्र के राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, हैकर्स ने विधायक के आधिकारिक मोबाइल नंबर का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर उनके परिचितों, समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को संदिग्ध मैसेज भेजने शुरू कर दिए। इन संदेशों में बेहद शातिर तरीके से किसी जरूरी काम या आपात स्थिति का हवाला देकर तत्काल आर्थिक मदद (ऑनलाइन ट्रांजैक्शन) की मांग की जा रही है। कुछ लोगों को संदिग्ध लिंक और क्यूआर कोड भी भेजे गए हैं। चूंकि मैसेज सीधे विधायक के नंबर से जा रहे थे, इसलिए शुरुआती दौर में समर्थकों और आम नागरिकों के बीच भारी भ्रम और चिंता की स्थिति पैदा हो गई। कई लोगों को शक तब हुआ जब बातचीत की भाषा और पैसे मांगने का तरीका असामान्य लगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक कार्यालय तुरंत हरकत में आया और इस संबंध में एक आवश्यक अलर्ट जारी किया गया। विधायक के पीए आशुतोष कुमार पांडे ने आधिकारिक तौर पर घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह सीधे तौर पर साइबर फ्रॉड का मामला है। उन्होंने बताया कि जैसे ही इस धोखाधड़ी का पता चला, तुरंत स्थानीय पुलिस प्रशासन और साइबर क्राइम सेल को इसकी लिखित सूचना देकर शिकायत दर्ज कराई गई। वर्तमान में पुलिस की तकनीकी टीम और साइबर विशेषज्ञ अकाउंट को सुरक्षित तरीके से रिकवर करने और हैकर्स का सुराग लगाने में जुटे हुए हैं।
घटना के वक्त विधायक प्रमोद कुमार सिन्हा रक्सौल से दूर पटना में थे, जहाँ से वे लगातार इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। विधायक कार्यालय और उनके पीए ने जनता से बेहद भावुक और सख्त अपील करते हुए कहा है कि यदि किसी भी व्यक्ति को विधायक के नंबर से पैसे की मांग, कोई अनजान लिंक, ओटीपी (OTP) या कोई भी संदिग्ध संदेश प्राप्त होता है, तो उसे पूरी तरह नजरअंदाज करें।

किसी भी परिस्थिति में न तो कोई राशि ट्रांसफर करें और न ही किसी लिंक पर क्लिक करें। यह घटना एक बार फिर यह चेतावनी देती है कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा कितनी अनिवार्य हो चुकी है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि जब तक किसी ऑनलाइन वित्तीय मांग की व्यक्तिगत रूप से पुष्टि न हो जाए, तब तक कोई भी लेन-देन नहीं करना चाहिए।
