Thursday, May 21

सूर्य मंदिर तालाब में मिला 11 किलो का विशाल कछुआ, रक्सौल में आस्था और पर्यावरण संरक्षण पर छिड़ी नई चर्चा

जानकार बोले — जीवित है तालाब का प्राकृतिक संतुलन

रक्सौल।(Vor desk)। शहर के मुख्य पथ स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर परिसर इन दिनों एक अनोखी घटना को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मंदिर के पवित्र तालाब से करीब 11 किलो वजनी विशाल कछुए के मिलने के बाद श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों में कौतूहल का माहौल है। लोग इसे केवल एक जलीय जीव की मौजूदगी नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के विशेष संदेश के रूप में देख रहे हैं।

जानकारी के अनुसार सूर्य मंदिर के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कार्य के तहत तालाब की उड़ाही कराई जा रही थी। इसी दौरान तालाब के भीतर अचानक विशालकाय कछुआ दिखाई दिया। देखते ही देखते मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

सनातन परंपरा में कछुए को धैर्य, स्थिरता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता यह भी है कि मंदिरों और पवित्र जलाशयों में कछुए की उपस्थिति शुभता और प्राकृतिक संरक्षण का संकेत देती है। यही वजह रही कि सूर्य मंदिर परिसर में मिले इस विशाल कछुए को लेकर लोगों में श्रद्धा और उत्सुकता दोनों देखने को मिली।

सूर्य मंदिर समिति के सचिव शम्भु प्रसाद चौरसिया, कोषाध्यक्ष गणेश अग्रवाल, राजू गुप्ता, गुड्डू खेतान आदि ने कहा कि सूर्य मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में इतने बड़े कछुए का मिलना आश्चर्य और श्रद्धा दोनों का विषय है। उनका कहना था कि यह घटना प्रकृति और धार्मिक चेतना के अद्भुत संगम का प्रतीक है।

वहीं पर्यावरण प्रेमियों और जानकारों का मानना है कि कछुए जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार किसी तालाब या जलाशय में कछुए की मौजूदगी इस बात का संकेत होती है कि वहां का प्राकृतिक वातावरण अभी पूरी तरह जीवित और सुरक्षित है।

घटना के बाद सूर्य मंदिर समिति ने लोगों से अपील की है कि तालाब में पूजा सामग्री, प्लास्टिक या अन्य अपशिष्ट सामग्री नहीं फेंकी जाए, ताकि जलाशय का प्राकृतिक संतुलन बना रहे और जलीय जीव सुरक्षित रह सकें।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण प्रेमियों ने भी इस घटना को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए लोगों से तालाबों, नदियों और जलाशयों को प्रदूषण मुक्त रखने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि जल स्रोत सुरक्षित रहेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण मिल सकेगा।

सूर्य मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी रजनीश प्रियदर्शी ने कहा कि मंदिर तालाब में मिले इस विशाल कछुए ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि जहां प्रकृति सुरक्षित रहती है, वहीं आस्था, जीवन और पर्यावरण का संतुलन भी कायम रहता है।

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