Friday, October 23

रक्सौल नगर परिषद की बैठक में कर्मियों के प्रोन्नति और चहेते पार्षदों के फेवर के सवाल पर बवाल,पार्षदों के समूह ने की एसडीओ से जांच कमेटी गठित करने की मांग

रक्सौल।(Vor desk)। नगर परिषद रक्सौल की साधारण बोर्ड बैठक सोमवार को भारी हंगामे और तीखे विवाद के बीच अधूरी रह गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अधिकांश पार्षदों ने पहले नगर परिषद कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और बाद में अनुमंडल कार्यालय पहुंचकर एसडीओ मनीष कुमार को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी शिकायतें दर्ज कराईं।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वार्ड-1 स्थित नगर परिषद प्रशासनिक भवन के सभागार में कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी की अध्यक्षता तथा कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. मनीष कुमार के संचालन में बैठक शुरू होनी थी। हालांकि कार्यपालक पदाधिकारी करीब एक घंटे की देरी से पहुंचे। बैठक की प्रक्रिया शुरू होते ही गत बैठक की संपुष्टि के लिए जब पूर्व बैठकों की कार्यवाही (प्रोसीडिंग) की प्रतियां वितरित की गईं, तभी विवाद भड़क उठा। पार्षद जितेंद्र दत्ता,कुंदन सिंह,वीरेंद्र कुमार आदि ने आरोप लगाया कि नियम के अनुसार 72 घंटे पहले प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई गईं।
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब स्थायी सशक्त समिति की 22 अप्रैल को प्रस्तावित बैठक रद्द किए जाने का मुद्दा उठा। समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि पिछले नौ महीनों से स्टैंडिंग कमेटी की बैठक नहीं बुलाई जा रही है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसी विरोध के तहत डिंपल चौरसिया, अंतिमा देवी, घनश्याम प्रसाद समेत कई पार्षदों ने लिखित बहिष्कार पत्र सौंपते हुए सदन का त्याग कर दिया और इसे कार्यवाही पुस्तिका में दर्ज करने की मांग की।
समिति सदस्यों के बहिष्कार के बाद भी विवाद थमा नहीं। नाराज कई पार्षदों ने योजनाओं के चयन में भेदभाव का आरोप लगाया। उनका कहना था कि कुछ “चहेते” वार्डों को 90 लाख रुपये तक की योजनाएं दी जा रही हैं, जबकि कई वार्डों में संकल्प के बावजूद 15 लाख रुपये तक के कार्य भी आवंटित नहीं किए गए।
इस असमानता को लेकर सदन में तीखी नोकझोंक हुई।
बैठक के दौरान कर्मचारियों की प्रोन्नति का मुद्दा भी विवाद का कारण बना। पार्षद मोहम्मद अब्बास द्वारा कर संग्राहक पंकज कुमार सिंह को टैक्स दरोगा तथा पार्षद रवि गुप्ता द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर अजीत कुमार श्रीवास्तव को प्रोन्नति देने के प्रस्ताव को लेकर हंगामा हुआ। पार्षदों ने आरोप लगाया कि यह एजेंडा बिना सूचीबद्ध किए और बिना सदन में चर्चा के बंद कमरे में लाया गया, जो पूरी तरह नियमविरुद्ध और अवैध है। इस पर भी कई पार्षद सदन छोड़कर बाहर निकल गए।
स्थिति ऐसी बन गई कि कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी, कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. मनीष कुमार सहित कोई चार पार्षद ही सदन में रह गए। पार्षदों के बड़े समूह ने बैठक के बहिष्कार की घोषणा कर दी। बाद में कार्यवाहक सभापति ने बैठक स्थगित करने की बात कही, जबकि कार्यपालक पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि बैठक औपचारिक रूप से हो ही नहीं सकी और इसकी रिपोर्ट विभाग तथा जिलाधिकारी को भेज दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक जनप्रतिनिधियों की होती है और प्रस्तावों पर निर्णय लेने का अधिकार उन्हीं के पास है, जबकि बहिष्कार का कोई औचित्य नहीं है।
कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी ने कहा कि सभी वार्डों में बिना भेदभाव समान रूप से विकास कार्य होने चाहिए, ताकि असंतोष की स्थिति न बने। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बैठक स्थगित होने के कारण प्रोन्नति से जुड़े मामलों पर कोई निर्णय नहीं हो सका। साथ ही उन्होंने बताया कि स्टैंडिंग कमेटी की बैठक कोर्ट के निर्देशों के कारण फिलहाल नहीं बुलाई जा रही है।
इधर, नाराज 19 पार्षदों का समूह अनुमंडल कार्यालय पहुंचा और एसडीओ मनीष कुमार को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच की मांग की। पार्षदों ने बैठकों की वीडियोग्राफी की जांच कराने और एक स्वतंत्र जांच टीम गठित करने की मांग उठाई। वार्ड 18की पार्षद सुगंधी देवी ने सदन में महिलाओं के अपमान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उन्हें अनपढ़ कहा गया।मुख्य पार्षद (सभापति) के रिक्त पद पर प्रस्तावित उपचुनाव से ठीक पहले हुई इस राजनीतिक उठापटक ने शहर में हलचल तेज कर दी है।

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