
रक्सौल।(Vor desk)। नगर परिषद रक्सौल की बहुप्रतीक्षित साधारण बोर्ड की बैठक सोमवार को हंगामे और विवाद की भेंट चढ़ गई। कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में 23 पार्षद उपस्थित थे, लेकिन अधिकारियों की लेटलतीफी और आंतरिक विवाद के कारण विकास कार्यों पर चर्चा होने के बजाय सदन में गतिरोध पैदा हो गया।
कार्यपालक पदाधिकारी के विलंब और गत बैठक की प्रोसिडिंग कॉपी ससमय उपलब्ध नहीं कराने पर जताई आपत्ति
बैठक में विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. मनीष कुमार निर्धारित समय से विलंब से पहुंचे। गत बैठक की प्रोसिडिंग कॉपी ससमय उपलब्ध नहीं कराते हुए सदन में वितरित किया गया।पार्षदों ने अधिकारियों की इस कार्यशैली पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे सदन की गरिमा के खिलाफ बताया।पार्षदों को इस बात का गुस्सा था कि उनके साथ योजनाओं में बंदरबांट और भेदभाव किया जा रहा है।कोई आधा दर्जन वार्ड में खास तौर पर ‘नजर ए इनायत’ की गई है।
स्टैंडिंग कमेटी की बैठक न होने पर बहिष्कार
हंगामे के बीच विक्षुब्ध पार्षदों ने सशक्त स्थायी समिति (Standing Committee) की बैठक पिछले 9 महीनों से नहीं बुलाए जाने का मुद्दा उठाया।पिछले 22अप्रैल को नगर विकास विभाग के निर्देश पर बैठक बुलाने के बावजूद ऐन वक्त पहले स्थगित कर दिया गया था,जिस पर आक्रोश देखा गया। पार्षदों का आरोप है कि महत्वपूर्ण निर्णयों में समिति की अनदेखी की जा रही है। विरोध स्वरूप डिंपल चौरसिया (वार्ड नं 24), अंतिमा देवी (वार्ड नं 17) और घनश्याम प्रसाद (वार्ड नं 06) समेत अन्य पार्षदों ने लिखित रूप से बैठक का बहिष्कार कर दिया।इसे कार्यवाहक पुस्तिका में अंकित करने की मांग रखी।इस पर विवाद बढ़ गया।
लिखा गया पत्र: पार्षदों ने कार्यपालक पदाधिकारी को सौंपे पत्र में स्पष्ट किया कि विगत 9 महीनों से बैठक नहीं बुलाए जाने के कारण वे आज की कार्यवाही का बहिष्कार कर सदन से बाहर जा रहे हैं। उन्होंने इस बहिष्कार को कार्यवाही पुस्तिका (Proceeding Book) में दर्ज करने की भी मांग की है।
एसडीओ कार्यालय पहुंचा मामला
सदन में बढ़ते तनाव को देखते हुए विक्षुब्ध पार्षदों की टीम शिकायत लेकर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) कार्यालय पहुंची। वहीं, दूसरी ओर सत्ता पक्ष के भी अपनी बात रखने के लिए वहां पहुंचने की सूचना है।।हालाकि,एसडीओ मनीष कुमार के कार्यालय में उपस्थित नहीं रहने से सभी प्रतीक्षारत बताए गए हैं
राजनीतिक गलियारों में हलचल
मुख्य पार्षद (सभापति) के आगामी चुनाव से ठीक पहले हुई इस घटना ने शहर की राजनीति में खलबली मचा दी है। वहीं,इस घटना के बाद कार्यपालक पदाधिकारी जन प्रतिनिधियों के निशाने पर आ गए हैं।विश्लेषकों का मानना है कि पार्षदों के बीच का यह असंतोष और अधिकारियों के प्रति नाराजगी आने वाले चुनाव के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल, नगर परिषद में व्याप्त यह गतिरोध पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
