
रक्सौल (बिहार) , 16अप्रैल2026।(Vor desk)।
रक्सौल के कोइरिया टोला नहर चौक पर बन रहा पांच करोड़ी हाई लेबल पुल विकास की धीमी रफ्तार और प्रशासनिक भ्रष्टाचार का ऐसा स्मारक बन चुका है, जिसने न केवल शहर की रफ्तार रोकी, बल्कि एक नौजवान की जिंदगी भी लील ली। बिहार में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने और भाजपा के नेतृत्व में एनडीए सरकार गठन ने आखिरकार एक साल से सोई ठेका कंपनी और अधिकारियों के हाथ-पाँव फुला दिए हैं। सत्ता परिवर्तन के बाद करवाई के डर से 14 अप्रैल से काम में जो ‘चुस्ती’ दिखाई दे रही है, वह सुधार कम और ‘लीपापोती’ ज्यादा नजर आ रही है।हालाकि,निर्माण के कारण आवाजाही प्रभावित होने और जन नाराजगी के बाद इस मामले पर क्षेत्रीय विधायक प्रमोद सिन्हा एक्टिव नजर आए।उन्होंने पुल निर्माण का स्थलगत निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्य जल्द पूर्ण कराने,आवाजाही व्यवस्थित करने,जाम मुक्ति का निर्देश दिया।
साढ़े चार करोड़ का प्रोजेक्ट, सालों का इंतजार
कोइरिया टोला नहर चौक पर लगभग ₹4.94 करोड़ की लागत से बनने वाले 3×6 मीटर ऊँचे RCC बॉक्स कलभर्ट (पुल) का शिलान्यास 24 दिसंबर 2024 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा किया गया था। अप्रैल 2025 में सांसद डॉ. संजय जायसवाल और विधायक प्रमोद कुमार सिन्हा ने इसका कार्यारंभ किया। लेकिन आज एक साल बाद भी स्थिति “सौ दिन चले ढाई कोस” वाली है।मुख्य ढांचा तैयार है, मगर एप्रोच रोड के अभाव में यह सफेद हाथी बना खड़ा है।

तकनीकी फेलियर: ‘प्रैक्टिकल’ नहीं है पुल का डिजाइन
इस पुल के डिजाइन पर सवाल उठाते हुए सीनियर क्वालिटी एंड मैटेरियल एक्सपर्ट ई. अशोक कुमार सिंह ने बड़ा खुलासा किया है। उनके अनुसार, “व्यावहारिक रूप से इस पुल का डिजाइन दोषपूर्ण है। तकनीकी रूप से जब फाउंडेशन (नींव) बन रहा था, तभी एप्रोच और रिवर्स वॉल पर काम शुरू होना चाहिए था।” आज एक साल बाद एप्रोच और रिवर्स वॉल बनाना केवल खानापूर्ति है। कोइरिया टोला जैसे हृदय स्थल पर, जहाँ छह प्रमुख सड़कें मिलती हैं, वहाँ इस तरह का निर्माण समस्या सुलझाने के बजाय बढ़ाने वाला साबित होगा।

‘पुल निगम’ के अधिकारियों की पिकनिक और मंत्री-चेयर मैन का बेअसर दखल
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के कार्यपालक अभियंता सहित शीर्ष अधिकारियों ने रक्सौल के कई दौरे किए, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं बदला। सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के वर्तमान एमडी शीर्षत कपिल अशोक स्वयं इस जिले के जिलाधिकारी और पुल निर्माण निगम के चेयरमैन रह चुके हैं।चूँकि पुल निर्माण निगम और पथ विकास निगम दोनों से जुड़े हैं, इसलिए अक्सर बैठकों और समन्वय कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है।उनके दखल और बैठकों के बावजूद ठेकेदार परवेज खान और स्टार बिल्डमैप प्राइवेट लिमिटेड की मनमानी पर लगाम नहीं लग सकी।जबकि,खुद तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन भी जून 2025के उस बैठक में स्वयं मौजूद थे।बैठक में बुनियादी ढांचा सुधारने और लोहा का डायवर्सन लगाने का निर्देश दिया गया था,जिस पर भी अमल नहीं हो सका। जन चर्चा में यह सवाल मुंह बाए खड़ा है कि क्या यह अधिकारियो और ठेकेदार के बीच गहरे ‘गठबंधन’ का नतीजा है?

दानिश जावेद की मौत और ‘बौना’ पड़ता कानून
बेतरकीब और गैर जिम्मेदाराना ढंग से जारी निर्माण के बीच अगस्त 2025 में बेतिया निवासी दानिश जावेद की मौत इस पुल की लापरवाही का सबसे काला अध्याय है। नगर परिषद के जेई राज कुमार राय ने ठेकेदार पर मुकदमा तो दर्ज कराया, लेकिन रसूख के आगे कानून बौना साबित हुआ।लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के बजाय मामले को ‘मैनेज’ कर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। आज भी इस पुल को जन-चर्चा में ‘नरबलिया पुल’ कहा जाता है।हाल ही में एक ई रिक्शा पलटने से चार महिलाएं दब गई थी।एक अन्य बुजुर्ग महिला गम्भीर घायल हो कर अस्पताल पहुंच गई थीं।जनवरी 2026में पुल को विधायक प्रमोद सिन्हा के पहल पर बिना एप्रोच के इसे किसी तरह मिट्टी भर कर चालू कर दिया गया।जिसके बाद से प्राय: यहां दुर्घटना होती रही है।

सामरिक सुरक्षा और लाइफलाइन पर संकट
NH-28A का यह खंड काठमांडू और दिल्ली को जोड़ने वाली लाइफलाइन है। यह मार्ग,एसएसबी (SSB) की सामरिक आवाजाही,डंकन अस्पताल और अनुमंडल अस्पताल की एम्बुलेंस,और फायर ब्रिगेड के लिए एकमात्र मुख्य रास्ता है।
एक साल से काम सुस्तचाल होने के कारण न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हुआ, बल्कि मरीजों की जान भी जोखिम में रही। आदापुर-भेलाही मार्ग पर की गई नहर सड़क की अवैध खुदाई और नहर में दोनों ओर मानक विहीन मिट्टी युक्त डायवर्जन से अब आदापुर की आवाजाही भी ठप्प है।आदापुर और मुख्य पथ में लक्ष्मीपुर की ओर से आवाजाही तकरीबन पूर्णतः बंद होने से हजारों लोग परेशान हैं।बीते दिनों इस कच्ची मिट्टी के डायवर्जन पर निर्माण सामग्री लदा एक ट्रैक्टर दुर्घटना का शिकार हुआ।माल वाहकों और बड़े वाहनों के चलने से कभी भी बड़े खतरे की आशंका बनी हुई है।निर्माण कार्य को लेकर कोई ‘साइन बोर्ड’ या ‘सूचना जारी ‘नहीं की गई है, जिससे बाहर से आने वाले यात्री सीधे निर्माण स्थल के मलबे में फंस रहे हैं।बैरीकेडिंग भी ना के बराबर है।

सांसद की चुप्पी पर सवाल,विपक्ष की चुप्पी दे रही टीस
इस पुल प्रकरण पर उंगलियां सभी की ओर है। क्षेत्र के कद्दावर नेता और सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने भी इस गंभीर मुद्दे पर अब तक चुप्पी साधे रखी। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले महागठबंधन ने इसे मुद्दा बनाया था और जन सुराज नेत्री पूर्णिमा भारती ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर आमरण अनशन तक किया था। लेकिन चुनाव खत्म होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ने चुप्पी साध ली।खास कर क्षेत्रीय सांसद डॉ. संजय जायसवाल की लगातार रहस्यमय चुप्पी पर जनता सवाल उठा रही है,हालाकि,उनके समर्थक सह भाजपा नेता गुड्डू सिंह और मनीष दुबे आदि कहते है कि वे कई बार इस पर अपने स्तर से पहल कर चुके हैं।आरोप है कि सांसद,विधायक और भाजपा के अन्य नेता सहित वीआईपी अब शहर के जाम से बचने के लिए अपने आवास या पार्टी मीटिंग में जाने हेतु आईसीपी (ICP) बाईपास का सहारा लेते हैं, जबकि आम जनता इस ‘नरक’ में फंसने को मजबूर है।

सम्राट सरकार में विधायक की बढ़ी हैसियत, जनता कर रही त्राहि त्राहि
पूर्व मुख्य मंत्री नीतीश कुमार के करीबी रहे भाजपा विधायक प्रमोद कुमार सिन्हा दोबारा निर्वाचित तो हो गए।सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से उनका कद बढ़ा है। लेकिन कोइरिया टोला पुल की समस्या जस की तस रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जनता की स्थिति नहीं बदल सकी है।
अब लग्न के दिनों में पुल निर्माण से आवाजाही बंद करने से जब जन-आक्रोश बढ़ा, तो पटना से लौटने के बाद आज 16 अप्रैल को विधायक श्री सिन्हा ने रक्सौल थाना मे एसडीएम मनीष कुमार,डीएसपी मनीष आनंद, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी डा मनीष आनंद,थानाध्यक्ष सह प्रशिक्षु आईपीएस हेमंत कुमार सिंह के साथ बैठक की और पुल निर्माण स्थल ,नए बस स्टैंड का स्थलगत निरीक्षण किया। उन्होंने डायवर्जन को डबल लेन करने और लक्ष्मीपुर बस स्टैंड को चालू करने का कड़ा निर्देश दिया है।आवाजाही व्यवस्थित करने,जाम मुक्त शहर बनाने का निर्देश दिया।
जनता का सवाल: गुनहगार कौन?
कोइरिया टोला सहित शहर के लोग अब केवल पुल नहीं, बल्कि बाबासाहेब डा अंबेडकर की आदम कद प्रतिमा युक्त एक आधुनिक गोलंबर की माँग कर रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या आनन-फानन में मिट्टी भर देने से दानिश जावेद वापस आ जाएगा? ‘हाईटेक इंडिया’ में जहाँ रातों-रात सड़कें बन जाती हैं, वहाँ बॉर्डर के इस संवेदनशील इलाके में एक साल तक काम क्यों लटका रहा? विश्लेषकों का कहना है कि एक ओर सैनिक सड़क है और दूसरी ओर घोड़ासहन नहर पथ—दोनों ही हमेशा चालू रहने वाले मार्ग हैं। ऐसे में दोषपूर्ण निर्माण और सुस्त रफ्तार रक्सौल के लिए भविष्य में और बड़े जाम और दुर्घटनाओं का संकट पैदा करेगी, इसमें तनिक भी शक नहीं।स्थानीय व्यवसाई राज कुमार कहते है कि रातों-रात पुल बनाने का दावा करने वाली व्यवस्था में लगातार कोताही और एक युवक की मौत यह बताने के लिए काफी है कि सिस्टम में ‘भ्रष्टाचार का दीमक’ कितनी गहराई तक लगा है।हालाकि,कंस्ट्रक्शन कंपनी के एक सुपरवाइजर रैंक के अधिकारी ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि कार्य इस्टीमेट के अनुसार ही हो रहा है।वहीं,पूरे प्रकरण पर बसपा के प्रदेश सचिव सह रक्सौल विधान सभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी चंद्र किशोर पाल ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और कानूनी करवाई की मांग की है।
