
काठमांडू/वीरगंज।(Vor desk) | विशेष संवाददाता
नेपाल की राजनीति में शुक्रवार को उस समय एक नया युग अवतरित हुआ, जब राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के प्रखर चेहरा बालेन्द्र शाह, जिन्हें दुनिया ‘बालेन’ के नाम से जानती है, ने देश के 43वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। शीतल निवास के भव्य गलियारों में जब राम नवमी के पावन अवसर पर दोपहर 12:34 बजे 108 बटुकों के स्वस्ति वाचन और 16 बौद्ध भिक्षुओं के अष्टमंगल पाठ की गूंज सुनाई दी, तो यह केवल एक शपथ ग्रहण नहीं बल्कि नेपाल के राजनीतिक इतिहास का ‘पावर शिफ्ट’ था। 36 वर्षीय बालेन ने हिंदू और बौद्ध दोनों रीति-रिवाजों से शपथ लेकर न केवल परंपराओं का सम्मान किया, बल्कि एक समावेशी नेतृत्व का संकेत भी दिया।

नेपाल के संसदीय इतिहास में यह पहली बार है जब राणा शासन के अंत के बाद पैदा हुआ कोई युवा सीधे सत्ता के शीर्ष पर पहुँचा है। बालेन ने न केवल 79 वर्षीय शेर बहादुर देउवा जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ा, बल्कि निर्निवर्तमान प्रधानमंत्री सुशीला कार्की से सत्ता की बागडोर संभाली, जो उम्र में उनसे लगभग दोगुनी बड़ी हैं। उनकी यह जीत किसी करिश्मे से कम नहीं है क्योंकि उन्होंने झापा-5 जैसे हाई-प्रोफाइल निर्वाचन क्षेत्र में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को 49 हजार से अधिक मतों के रिकॉर्ड अंतर से शिकस्त देकर सबको स्तब्ध कर दिया।

बालेन का प्रधानमंत्री बनना मधेश की माटी के लिए भी गौरव का क्षण है। महोत्तरी जिले के एकडरा गाँवपालिका की जड़ों से जुड़े बालेन, संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य नेपाल के पहले मधेशी प्रधानमंत्री बने हैं। प्रसिद्ध चिकित्सक स्वर्गीय डॉ. राम नारायण शाह के पुत्र बालेन ने काठमांडू में जन्म लेने के बावजूद अपनी मधेशी पहचान को हमेशा संजोकर रखा है। भारत के कर्नाटक से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में एम.टेक करने वाले बालेन ने 2015 के भूकंप के बाद पुनर्निर्माण कार्यों में अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और सेवा भावना का परिचय दिया था, जिसने उन्हें जन-जन का प्रिय बना दिया।
मेयर पद से इस्तीफा देकर आरएसपी में शामिल होने के महज ढाई महीने के भीतर प्रधानमंत्री पद तक पहुँचना बालेन की अदम्य लोकप्रियता का प्रमाण है। उनकी 15 सदस्यीय नई कैबिनेट भी ‘युवा शक्ति’ की गवाह बनी है, जिसमें 7 मंत्री 40 वर्ष से कम उम्र के हैं। 39 वर्षीय सुधन गुरुंग को गृह मंत्री नियुक्त कर बालेन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब देश का ‘स्ट्रक्चरल ऑडिट’ और ‘री-कंस्ट्रक्शन’ युवा हाथों द्वारा किया जाएगा। आरएसपी द्वारा 182 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत हासिल करने के बाद, अब नेपाल में वर्षों से चली आ रही अस्थिर गठबंधन सरकारों के दौर पर विराम लग गया है, जिससे विकास की नई उम्मीदें जगी हैं।
