‘वर्चुअल रैली’ के दौर में वोट तो मिलेंगे,भूख से मर रही बुढ़िया की ‘दुआ’ कैसे मिलेगी?
रक्सौल।( vor desk )।अब भूखे मर जाएगी बुढ़िया!हॉ, भूखे...क्योकि उसे खाना नसीब नही है।जैसे तैसे जीना भी मुश्किल है।इससे शासन को मतलब नही ,प्रशासन को पता नही।यह बुढ़िया पहले कैसे जीती थी,यह किसी को नही पता।लेकिन, लॉक डाउन में रंजीत सिंह ने उसे सहारा दिया।सुबह शाम खीर पूड़ी खिलाई और लगातार भोजन दी। अब अनलॉक 1 शुरू होने व बाजार खुलने के बाद स्वच्छ रक्सौल की ओर से पहली वाली स्थिति नही रही। यानी रणजीत सिंह की टीम की ओर से खाना कमोवेश आ रहा है।हालांकि,रणजीत सिंह का संकल्प है कि वे भोजन की व्यवस्था करते रहेंगे।उनका कहना है कि हमने तब से उनकी देख रेख शुरू की,जब उनका वस्त्र शौच से सना रहता था।हमने डॉ0 मुराद आलम से इलाज भी कराई,ख़ाना भी दी।हमारा प्रयास है कि यह क्रम निरन्तर जारी रहे।
इधर,किस्मत की मारी बुढ़िया ना चल पा रही है ना खड़ा हो पा रही है। बस रेंगती है।हद तो तब हो जाती हैं जब वो बारिश...









