रक्सौल में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का सितम: कागजों में अलाव और हकीकत में ठिठुर रहे लोग,अब तक नहीं बन सका आश्रय स्थल!
रक्सौल।(Vor desk)। सीमावर्ती क्षेत्र रक्सौल समेत आसपास के इलाकों में कड़ाके की ठंड और कनकनी ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जहाँ लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं, वहीं रक्सौल स्टेशन और प्रमुख चौराहों पर प्रशासन के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। विशेषकर यात्री, रिक्शा चालक, ठेला चलाने वाले और असहाय लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं।
स्टेशन पर बदहाली: कूड़े के सहारे रात काटने को मजबूर यात्री
रक्सौल रेलवे स्टेशन के आसपास अलाव की कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिख रही है। भीषण ठंड से बचने के लिए यात्री स्वयं ही आसपास के कूड़े और सूखे पत्तों को चुनकर आग जला रहे हैं। हालांकि, नगर परिषद ने शहर के 15 अलग-अलग स्थानों जैसे कस्टम चौक, बाटा चौक और रेलवे स्टेशन पर अलाव जलाने का दावा किया है, लेकिन धरातल पर यात्री अब भी ठंड से जूझ रहे हैं।
रैन बसेरा निर्माण की सुस्त चाल पर ...









