आस्था की ‘मजबूरी’ और चुनावी मुद्दा: रक्सौल की ‘ज़हरीली’ सरिसवा नदी के तट पर कार्तिक पूर्णिमा का मेला
रक्सौल, बिहार(vor desk)।: कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर, जहाँ पूरे देश में पवित्र नदियों में स्नान कर आस्था व्यक्त की गई, वहीं भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल की उत्तरवाहिनी सरिसवा नदी का दृश्य एक गहरी विडंबना पेश कर रहा था। एक ओर भकुआ ब्रह्म बाबा मंदिर घाट पर पारंपरिक मेले में बच्चों से लेकर बड़ों तक का उत्साह था, तो दूसरी ओर नदी के काले और जहरीले जल ने प्रकृति संरक्षण के प्रति सरकारी असंवेदनशीलता की कड़वी सच्चाई उजागर कर दी।
गंगा स्नान की सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करने के लिए बुधवार को सरिसवा नदी के तट पर भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने दीप जलाए, गौ दान किया और पूजा-अर्चना की, लेकिन एक महत्वपूर्ण तथ्य इस पूरे आयोजन पर भारी रहा: नदी में कोई स्नान नहीं कर रहा था। धार्मिक ग्रंथों में उत्तरवाहिनी नदी में स्नान को मोक्षदायक माना जाता है, पर सरिसवा का जल नेपाल की ओर से आने वाले...









