Saturday, November 7

कस्टम ड्यूटी की चोरी कर नेपाल पहुंची मछली की खेप, 32 लाख का ट्रक जब्त

भंसार दस्तावेज में 96 कैरेट, ट्रक में मिली 140 कैरेट मछली; 44 कैरेट अतिरिक्त खेप पर राजस्व चोरी का आरोप, रक्सौल से वीरगंज तक निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

रक्सौल (Vor Desk)। भारत-नेपाल के प्रमुख व्यापारिक और ट्रांजिट रूट रक्सौल-वीरगंज पर सीमा शुल्क चोरी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सीमा की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रक्सौल से नेपाल भेजी गई मछली की खेप वीरगंज स्थित इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) के पास पकड़ी गई। भंसार दस्तावेज में 96 कैरेट मछली दर्ज थी, जबकि ट्रक की तलाशी में 140 कैरेट मछली मिली। यानी 44 कैरेट अतिरिक्त मछली कागजी विवरण से बाहर थी। इस मामले में पर्सा पुलिस ने करीब 32.11 लाख रुपये मूल्य के ट्रक और मछली को जब्त कर चालक को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, विशेष सूचना के आधार पर नेपाल के परसा जिला के वीरगंज स्थित वडा पुलिस कार्यालय श्रीपुर और पुलिस चौकी सिर्सिया की संयुक्त टीम ने वीरगंज महानगरपालिका-25 स्थित आईसीपी सड़क खंड पर प्रदेश 2-03-001 ख 7074 नंबर के टाटा ट्रक को रोककर जांच की। जांच में भंसार प्रज्ञापनपत्र और ट्रक में लदी मछली की वास्तविक मात्रा में अंतर मिला। पुलिस ने ट्रक चालक वीरगंज महानगरपालिका-21 निवासी 23 वर्षीय रवी कुमार साह को गिरफ्तार कर लिया। जब्त ट्रक और मछली का कुल मूल्यांकन 32 लाख 11 हजार 392 रुपये किया गया है।

डीएसपी चक्रबहादुर मल्ल के मुताबिक, जब्त ट्रक, मछली और चालक को गुरुवार को आवश्यक जांच एवं कानूनी कार्रवाई के लिए वीरगंज भंसार कार्यालय को सौंप दिया गया।

रक्सौल से आईसीपी तक आखिर किसकी नजर से गुजरी खेप?

इस कार्रवाई ने सबसे बड़ा सवाल रक्सौल-वीरगंज सीमा की निगरानी व्यवस्था पर खड़ा किया है। रक्सौल और वीरगंज भारत-नेपाल के बीच प्रमुख व्यापारिक गलियारा हैं। यहां सीमा शुल्क विभाग, एसएसबी और आईसीपी की निगरानी व्यवस्था के बीच मालवाहक वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में सवाल है कि 44 कैरेट अतिरिक्त मछली लेकर ट्रक भारतीय सीमा से कैसे निकला? क्या रक्सौल में भंसार और निर्यात संबंधी दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ? क्या माल की वास्तविक मात्रा और कागजी विवरण का मिलान नहीं किया गया?

जब ट्रक वीरगंज के आईसीपी मार्ग तक पहुंच गया, तब तक रास्ते में हुई जांच का नतीजा क्या था? यदि दस्तावेज में 96 कैरेट दर्ज था और वास्तविक खेप 140 कैरेट थी, तो यह अंतर किसी भी जांच प्रक्रिया में पकड़ में क्यों नहीं आया?

निगरानी व्यवस्था पर उच्चस्तरीय जांच की मांग

यह मामला महज 44 कैरेट अतिरिक्त मछली पकड़े जाने तक सीमित नहीं है। इससे सीमा पार व्यापार में कागजी विवरण और वास्तविक माल के बीच अंतर कर राजस्व को नुकसान पहुंचाने की आशंका भी सामने आई है। सवाल यह भी है कि क्या यह किसी एक खेप तक सीमित है या इस तरह की हेराफेरी अन्य मालवाहक वाहनों में भी हो रही है?

सीमा शुल्क चोरी के इस मामले में रक्सौल से वीरगंज तक की पूरी परिवहन और जांच प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठ रही है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि अतिरिक्त मछली कहां लादी गई, किस स्तर पर दस्तावेजों में कम मात्रा दर्ज हुई और सीमा पर तैनात निगरानी एजेंसियों की जांच के बावजूद यह खेप कैसे आगे बढ़ गई। जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलता, तब तक सीमा की निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल बने रहेंगे।

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