Saturday, November 7

भारत-नेपाल सीमा पर पहचान की नई व्यवस्था, अब दोनों देशों के नागरिकों की होगी आव्रजन जांच

गृह मंत्रालय का संशोधित आदेश 5 नवंबर से लागू, रक्सौल-वीरगंज सहित सभी भारत-नेपाल सीमा मार्गों पर पहचान संबंधी दस्तावेज दिखाना होगा अनिवार्य; खुली सीमा और वीजा मुक्त आवाजाही जारी रहेगी

रक्सौल (Vor Desk)। भारत-नेपाल की खुली सीमा पर आवाजाही की व्यवस्था में अब पहचान सत्यापन को कानूनी रूप से और स्पष्ट कर दिया गया है। भारत सरकार ने नेपाल और भूटान से आने-जाने वाले अपने नागरिकों के साथ नेपाली और भूटानी नागरिकों के लिए भी आव्रजन अधिकारियों के समक्ष पहचान संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य किया है। इसका सीधा असर रक्सौल-वीरगंज सहित भारत-नेपाल के सभी प्रमुख सीमा मार्गों पर पड़ सकता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच पारंपरिक खुली सीमा व्यवस्था समाप्त नहीं की गई है और नेपाली नागरिकों के लिए भारत आने पर वीजा की अनिवार्यता भी नहीं लागू की गई है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 4 नवंबर 2026 को अधिसूचना संख्या एसओ 6027(ई) जारी कर ‘इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स (एग्जेम्पशन) (अमेंडमेंट) ऑर्डर, 2026’ में संशोधन किया है। संयुक्त सचिव डॉ. संदीप एन. महात्मे के हस्ताक्षर से जारी यह आदेश 5 नवंबर को भारत के राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ प्रभावी हो गया। इसके तहत वर्ष 2025 के इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स (एग्जेम्पशन) ऑर्डर में बदलाव किया गया है।

रक्सौल सीमा पर क्या बदलेगा?

नए प्रावधान के अनुसार, नेपाल से सड़क या हवाई मार्ग से भारत आने वाले नेपाली नागरिकों को आव्रजन अधिकारी के समक्ष केंद्र सरकार के वीजा मैनुअल में निर्धारित पहचान संबंधी दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना होगा। यही व्यवस्था भारत से नेपाल जाने वाले भारतीय नागरिकों पर भी लागू होगी। अधिकारियों की ओर से मांगी गई अतिरिक्त जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।

इसका मतलब है कि रक्सौल-वीरगंज सीमा से भारत आने-जाने वाले यात्रियों की पहचान सत्यापन की प्रक्रिया अब संशोधित आव्रजन आदेश के तहत स्पष्ट रूप से निर्धारित होगी। सीमा पर सुरक्षा जांच और आव्रजन जांच की भूमिकाएं अलग-अलग हैं। एसएसबी सुरक्षा के लिहाज से पहचान की जांच करती है, जबकि नए आदेश में आव्रजन अधिकारी के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करने की शर्त निर्धारित की गई है।

भारतीय नागरिकों को भी पहचान बतानी होगी

नए नियम में केवल नेपाली नागरिकों को ही नहीं, बल्कि नेपाल और भूटान जाने वाले भारतीय नागरिकों को भी शामिल किया गया है। उन्हें भारत से नेपाल या भूटान जाते समय और वहां से लौटते समय आव्रजन अधिकारी के समक्ष वीजा मैनुअल में निर्धारित पहचान दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना होगा।

हालांकि, नेपाल या भूटान के रास्ते किसी तीसरे देश की यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों को इस छूट का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे यात्रियों के पास वैध पासपोर्ट होना अनिवार्य है। भारत में प्रवेश और निकास भी निर्धारित आव्रजन जांच चौकियों से ही करना होगा।

चीन, हांगकांग और पाकिस्तान से आने वालों पर सख्ती

संशोधित आदेश में नेपाली और भूटानी नागरिकों के लिए तीसरे देशों से भारत आने की स्थिति को भी स्पष्ट किया गया है। नेपाल और भूटान के अलावा किसी अन्य देश से भारत आने या वहां जाने वाले नागरिकों के पास वैध पासपोर्ट होना जरूरी होगा।

विशेष रूप से चीन, मकाउ, हांगकांग या पाकिस्तान से होकर भारत आने वाले नेपाली और भूटानी नागरिकों को वैध पासपोर्ट के साथ भारतीय वीजा भी प्रस्तुत करना होगा। इन देशों में विमान से यात्रा शुरू करने या ट्रांजिट करने वाले यात्रियों पर भी यह प्रावधान लागू होगा।

क्या बंद हो जाएगी भारत-नेपाल की खुली सीमा?

नए आदेश को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत ने नेपाल के साथ खुली सीमा व्यवस्था समाप्त नहीं की है। नेपाली नागरिकों को भारत आने के लिए सामान्य परिस्थितियों में वीजा या पासपोर्ट अनिवार्य नहीं किया गया है। इसी तरह भारतीय नागरिक भी निर्धारित पहचान दस्तावेज के आधार पर नेपाल जा सकेंगे।

हालांकि, अब पहचान सत्यापन को आव्रजन व्यवस्था का स्पष्ट हिस्सा बनाया गया है। इसका उद्देश्य सीमा पार करने वाले लोगों की पहचान स्थापित करना और आव्रजन संबंधी जानकारी को व्यवस्थित करना है।

विशेष श्रेणियों को भी छूट का प्रावधान

संशोधित आदेश में कुछ विशेष श्रेणियों के लिए पासपोर्ट और वीजा संबंधी छूट भी जारी रखी गई है। इनमें सरकारी ड्यूटी पर भारत आने-जाने वाले थल सेना, नौसेना और वायुसेना के सदस्य तथा सरकारी परिवहन से उनके साथ यात्रा करने वाले परिवार के सदस्य शामिल हैं।

इसके अलावा 9 जनवरी 2015 तक भारत में शरण लेने वाले और निर्धारित अधिकारियों के समक्ष पंजीकृत श्रीलंकाई तमिल नागरिकों को भी छूट दी गई है। मरम्मत के लिए भारत आने वाले विदेशी सैन्य जहाजों के चालक दल के सदस्यों को निर्धारित सैन्य परिचय पत्र और मिलिट्री शिप रिपेयर परमिट के आधार पर छूट मिलेगी।

नेपाल स्थित भारतीय दूतावास से जारी प्रवेश अनुमति के आधार पर निर्धारित अवधि में भारत आए और संबंधित अधिकारियों के पास पंजीकृत कुछ तिब्बती नागरिकों को भी इस प्रावधान में शामिल किया गया है।

वहीं, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न या उसके भय के कारण भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के नागरिकों को भी विशेष छूट दी गई है। इसके लिए उनका भारत में प्रवेश 31 दिसंबर 2024 या उससे पहले होना आवश्यक है। हालांकि, भारत में आगे रहने के लिए उन्हें निर्धारित श्रेणी का वीजा लेना होगा।

वीजा मैनुअल के आधार पर तय होंगे पहचान दस्तावेज

गृह मंत्रालय ने संशोधित आदेश में वीजा मैनुअल की परिभाषा भी जोड़ी है। इसके तहत केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर जारी वीजा, आव्रजन और संबंधित निर्देशों में निर्धारित दस्तावेज पहचान के लिए मान्य होंगे। संशोधित अधिसूचना में सभी स्वीकार्य पहचान पत्रों की अलग सूची नहीं दी गई है। इसलिए यात्रियों के लिए लागू दस्तावेजों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक निर्देशों से करना जरूरी होगा।

सीमा क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव

रक्सौल-वीरगंज सीमा भारत और नेपाल के बीच व्यापार, रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा और पारिवारिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण आवागमन मार्ग है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में दोनों देशों के नागरिक इस सीमा से आवाजाही करते हैं। ऐसे में पहचान सत्यापन की नई कानूनी व्यवस्था का असर केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीमा क्षेत्र की सामान्य आवाजाही और आव्रजन प्रक्रिया के संचालन में भी इसकी अहम भूमिका होगी।(रिपोर्ट: पीके गुप्ता)

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