Saturday, September 19

बैठक से पहले ‘पैचिंग’ की पटकथा? नगर परिषद में गतिरोध टूटा, प्राथमिकी पर पुलिस खामोश!

19 सितंबर को सभागार में होगी स्टैंडिंग कमेटी की बैठक; ईओ-सभापति के बीच स्थान को लेकर तनातनी के बाद बनी सहमति, फाइल-सीसीटीवी प्रकरण में दोनों पक्षों के आवेदन पर पुलिस की स्थिति अब भी साफ नहीं

रक्सौल। (Vor desk)। रक्सौल नगर परिषद में पिछले कुछ दिनों से चल रही ईओ बनाम कार्यवाहक सभापति की खींचतान के बीच अचानक रास्ता साफ हो गया है। जिस स्टैंडिंग कमेटी की बैठक के स्थान को लेकर टकराव की स्थिति बन गयी थी, वह अब 19 सितंबर को नगर परिषद के मुख्य सभागार में होगी।

लेकिन बैठक का रास्ता साफ होते ही एक दूसरा सवाल और तेज हो गया है—क्या नगर परिषद के भीतर चल रहे गतिरोध की ‘पैचिंग’ हो गयी है, या सिर्फ बैठक कराने भर पर सहमति बनी है?

गुरुवार को मोदी दीपोत्सव कार्यक्रम में रक्सौल पहुंचे सांसद और विधायक की सक्रियता, एक बैठक की चर्चा और नगर परिषद के भीतर गुरुवार की देर शाम 15 पार्षदों के एक गुट की बैठक , कार्यवाहक सभापति के पति राकेश कुशवाहा के द्वारा शुक्रवार की सुबह बुलाई बैठक रद्द होने की खबरों के बीच अचानक बैठक स्थल को लेकर बनी खींचतान खत्म होना चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, इस कथित ‘पैचिंग’ की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह फिलहाल नगर परिषद के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चल रही चर्चा भर है। सभी अपने ढंग से इस पर कयास लगा रहे है।

*पहले कक्ष पर अड़चन, अब सभागार पर सहमति

कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी ने पत्रांक 132/26, दिनांक 15 सितंबर 2026 के माध्यम से 19 सितंबर को अपराह्न 12:30 बजे नगर प्रबंधक कक्ष में बैठक बुलायी थी। ईओ डॉ. मनीष कुमार ने इस स्थान पर बैठक कराने से असहमति जताते हुए पूर्व निर्धारित नगर परिषद कक्ष में बैठक कराने की बात कही।

ईओ का तर्क था कि नगर प्रबंधक कक्ष हालिया फाइल और सीसीटीवी प्रकरण से जुड़ा है तथा हरैया थाना पुलिस की जांच के दायरे में है। उन्होंने बिहार नगरपालिका सशक्त स्थायी समिति कार्य संचालन नियमावली, 2010 की कंडिका-3 का हवाला भी दिया।

अब वही विवादित स्थिति पीछे छूटती दिख रही है और मुख्य सभागार बैठक का स्थल तय हो गया है।

स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य जितेंद्र दत्ता और रंजीत श्रीवास्तव की पहल को भी बैठक कराने में महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। 15 पार्षदों के एक गुट की बैठक में भी नगर परिषद की मौजूदा स्थिति और बचे हुए करीब एक वर्ष के कार्यकाल को लेकर चर्चा होने की सूचना है।सभी का जोर विकास योजनाओं पर है,क्योंकि, चुनावी वर्ष सामने है।यही कारण है कि कार्यवाहक सभापति का एतराज उन्हें अल्पमत में धकेल सकता है,जिसके संकेत पहले से ही हैं।

*बैठक होगी, लेकिन क्या विवाद भी साथ बैठेगा?

ईओ डॉ. मनीष कुमार ने स्पष्ट किया कि बैठक पूर्व निर्धारित समय पर नगर परिषद के सभागार में होगी। उन्होंने कहा कि बैठक कार्यवाहक सभापति के नेतृत्व में होती है और अन्य जानकारी उन्हीं से ली जानी चाहिए।

यानी बैठक को लेकर अब कोई तकनीकी अड़चन नहीं बची। लेकिन असली सवाल बैठक के बाद का है।

क्या ईओ और कार्यवाहक सभापति के बीच कामकाज में समन्वय कायम होगा? क्या फाइल और सीसीटीवी प्रकरण की कार्रवाई अपने रास्ते चलेगी? और क्या पुलिस को दिए गए दोनों पक्षों के आवेदनों पर भी अब स्थिति स्पष्ट होगी?

*’पैचिंग’ की चर्चा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं

नगर परिषद से जुड़े लोगों के बीच यह चर्चा है कि गुरुवार और शुक्रवार को हुई राजनीतिक सक्रियता के बाद मामले को संभालने की कोशिश हुई। कुछ लोगों के अनुसार, बैठक को टकराव का अखाड़ा बनने से बचाने के लिए आपसी समन्वय की पहल की गयी।

इसी को लेकर ‘पैचिंग’ शब्द भी चर्चा में है।

लेकिन यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी स्तर से ऐसी किसी समझौता प्रक्रिया या राजनीतिक हस्तक्षेप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है। इसलिए इसे फिलहाल चर्चाओं और सूत्रों से सामने आयी जानकारी के रूप में ही देखा जा रहा है।

*प्राथमिकी पर पुलिस की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल

इस पूरे प्रकरण में अब सबसे अधिक सवाल पुलिस की भूमिका और सूचना देने की प्रक्रिया पर उठ रहे हैं।

एक ओर नगर परिषद की ओर से फाइल, सीसीटीवी और कार्यालय से जुड़े मामले में नप के निर्देश पर कर संग्राहक पंकज कुमार सिंह के द्वारा पुलिस को आवेदन दिया गया। दूसरी ओर निलंबित प्रभारी प्रधान सहायक चंदेश्वर बैठा ने भी पुलिस को आवेदन देकर ईओ डॉ. मनीष कुमार और कर संग्राहक पंकज कुमार सिंह पर गंभीर आरोप लगाए।

चंदेश्वर बैठा ने अपने आवेदन में प्रोन्नति के लिए 20 लाख रुपये मांगने, जातिसूचक शब्दों के प्रयोग और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। उन्होंने ब्लैंक चेक संख्या 933623 दिए जाने तथा उससे तीन लाख रुपये की निकासी किए जाने का दावा भी किया है।

ये आरोप आवेदन में किए गए दावे हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष इन आरोपों पर सामने आना शेष है।

दूसरी ओर नगर परिषद का आरोप है कि 31 अगस्त को चंदेश्वर बैठा और उच्च वर्गीय सहायक मृत्युंजय मृणाल नगर प्रबंधक कक्ष में एक बाहरी व्यक्ति को बैठाकर सरकारी फाइल दिखा रहे थे और इसी दौरान सीसीटीवी कैमरा क्षतिग्रस्त हुआ। नगर परिषद ने दोनों कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगने के बाद उन्हें निलंबित किया और विभागीय कार्रवाई शुरू की।बाहरी व्यक्ति के रूप में कार्यवाहक सभापति के पति निशाने पर रहे,जिन्हें अनधिकृत रूप से फाइल दिखाने का आरोप चर्चा में है।

अब सवाल यह है कि जब दोनों ओर से पुलिस के समक्ष आवेदन मौजूद हैं, पुलिस जांच भी कर चुकी है, तो प्राथमिकी की स्थिति क्या है?

*थानाध्यक्ष ने गेंद एसडीपीओ के पाले में डाली

हरैया थाना पुलिस के नगर परिषद कार्यालय पहुंचकर जांच करने की बात सामने आ चुकी है। अधिकारियों और कर्मियों से पूछताछ भी हुई है। इसके बावजूद प्राथमिकी की स्थिति पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आयी है।

हरैया थानाध्यक्ष किशन कुमार पासवान से जब प्राथमिकी की स्थिति पूछी गयी तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में एसडीपीओ ही जानकारी दे सकेंगे।

यहीं से पुलिस की साफगोई पर सवाल खड़े होते हैं।

मामला नगर परिषद जैसे सार्वजनिक संस्थान से जुड़ा है। दोनों पक्षों से आवेदन दिए जाने की बात सामने है। जांच भी हुई है। ऐसे में प्राथमिकी दर्ज हुई या नहीं, आवेदन किस स्तर पर लंबित है, जांच किस अधिकारी के पास है और आगे की कार्रवाई क्या है—इन सवालों का स्पष्ट जवाब जनता को मिलना चाहिए।…किसी पक्ष के पक्ष में नहीं, बल्कि प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए!

*‘वरीय अधिकारी’ होने की चर्चा भी जांच के घेरे में

नगर परिषद के गलियारों में यह चर्चा भी है कि ईओ के वरीय पद पर होने के कारण उनके विरुद्ध कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सावधानी बरती जा रही है। कुछ लोगों का दावा है कि यदि केवल कर संग्राहक पंकज कुमार सिंह के विरुद्ध आवेदन होता तो प्राथमिकी की प्रक्रिया अलग गति से आगे बढ़ सकती थी।

हालांकि, यह एक चर्चा और दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी अधिकारी के पद या वरीयता के आधार पर पुलिस कार्रवाई प्रभावित हुई है, ऐसा निष्कर्ष फिलहाल उपलब्ध तथ्यों से नहीं निकाला जा सकता।हालाकि, रक्सौल प्रशासन ने भी अपने स्तर से पूछ ताछ और जांच भी की है।

यही कारण है कि पुलिस से साफ स्थिति सामने आने की जरूरत और बढ़ जाती है।

*चंदेश्वर प्रकरण पर भी टिकी नजर

दोनों कर्मियों के निलंबन और विभागीय कार्रवाई के बीच अब चंदेश्वर बैठा की ओर से दिए गए आवेदन पर भी नजर है। एक तरफ नगर परिषद की विभागीय कार्रवाई चल रही है, दूसरी ओर उनके द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप पुलिस जांच का विषय हैं।

इन दोनों प्रक्रियाओं को अलग-अलग देखा जाना जरूरी है। विभागीय निलंबन किसी आपराधिक आरोप के स्वतः सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है और पुलिस को दिया गया आवेदन भी आरोपों के सत्यापन के बिना अपराध सिद्ध नहीं करता।

*अब बैठक से ज्यादा नजर उसके बाद पर

19 सितंबर की बैठक होनी तय है। सफाई, पर्व-त्योहारों की तैयारी, ट्रैफिक, स्ट्रीट लाइट और राजस्व जैसे शहर से जुड़े मुद्दे एजेंडे में हैं। लेकिन नगर परिषद की राजनीति में बैठक से कहीं बड़ा सवाल अब यह है कि क्या यह सहमति कामकाज तक पहुंचेगी या सिर्फ बैठक की तारीख और जगह तय करने तक सीमित रहेगी?

‘पैचिंग’ की चर्चा अपनी जगह है, राजनीतिक सक्रियता अपनी जगह और प्रशासनिक कार्रवाई अपनी जगह।

लेकिन फाइल-सीसीटीवी प्रकरण और चंदेश्वर बैठा के आरोपों पर पुलिस की स्पष्ट स्थिति सामने आना अभी बाकी है।

नगर परिषद की बैठक हो जाएगी। बहस भी होगी। प्रस्ताव भी आ सकते हैं।
लेकिन प्राथमिकी हुई या नहीं—इस एक सवाल पर पुलिस की स्पष्टता अब भी बाकी है।

और यही वह सवाल है, जिसका जवाब नगर परिषद के कर्मचारियों से लेकर पार्षदों और शहर के लोगों तक जानना चाहते हैं।(रिपोर्ट:श्रेयांश कुमार बिट्टू/पीके गुप्ता)

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