
विशेष संवाददाता | पटना / मुजफ्फरपुर/वीरगंज(नेपाल)
नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह तिब्बत सीमा के पास अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। सुबह करीब नौ बजे भोटे कोशी नदी में पानी का बहाव अचानक बेहद तेज हो गया, जिससे तिमुरे और स्याफ्रुबेसी के तटीय इलाके जलमग्न हो गए। आशंका जताई जा रही है कि तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियल झील (हिमताल) फटने और उससे डैम टूटने ,के कारण यह जल प्रलय आया है।बाढ़ के प्रचंड वेग में त्रिशूली बाजार सहित कई गांव, बाजार, वाहन, दर्जनों कंक्रीट और झूला पुल बह गए हैं, जिससे कई दूरस्थ इलाकों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। इस आपदा में बड़े पैमाने पर जान-माल की क्षति का अनुमान है। टिमुरे बॉर्डर पोस्ट पर तैनात सशस्त्र पुलिस बल (APF) के नौ जवानों और 384 से अधिक देशी विदेशी पर्यटकों ,नागरिकों के लापता होने की अधिकृत पुष्टि हुई है। प्रभावित क्षेत्रों में नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर और बचाव दल राहत अभियान में जुटे हैं।
नेपाल की इस त्रासदी का सीधा असर अब बिहार पर भी दिखाई देने लगा है। भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों का उफनता जल आगे चलकर नारायणी नदी में मिल रहा है, जो भारतीय सीमा में प्रवेश करते ही गंडक नदी का रूप ले लेती है। गंडक के जलग्रहण क्षेत्र में भारी मात्रा में पानी आने से बिहार के मैदानी इलाकों में जलस्तर अचानक तीन मीटर तक बढ़ने की गंभीर आशंका जताई गई है। स्थिति को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने मुजफ्फरपुर, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण और वैशाली समेत कई सीमावर्ती जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है। गंडक व बूढ़ी गंडक के तटबंधों पर जल संसाधन विभाग के अभियंताओं की चौबीसों घंटे गश्त लगा दी गई है, जबकि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है।
प्रलयंकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल में काठमांडू को जोड़ने वाले प्रमुख राजमार्ग और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग पूरी तरह ठप हो गए हैं। धादिङ के मलेखु स्थित फुर्केखोला पुल और रसुवागढ़ी का फ्रेंडशिप ब्रिज ध्वस्त होने से आवागमन पूरी तरह बाधित है। नेपाल प्रशासन ने पृथ्वी राजमार्ग, गल्छी-नुवाकोट-रसुवा तथा मुग्लिन-नारायणगढ़ सड़कों पर यात्रा न करने की सख्त सलाह जारी की है। वहीं, बिहार प्रशासन ने भी भारतीय पर्यटकों और श्रद्धालुओं से स्थिति सामान्य होने तक नेपाल यात्रा स्थगित रखने का आग्रह किया है।
