
उड़ान क्षेत्र में भवन, टावर, पानी की टंकी व मास्क लाइट चिन्हित; नगर परिषद के 12 वार्डों में 83 संरचनाएं
रक्सौल।(Vor desk)। भारत-नेपाल सीमा से सटे अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक शहर रक्सौल में प्रस्तावित एयरपोर्ट के निर्माण और संचालन की तैयारी एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गयी है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के ओएलएस (ऑब्स्टेकल लिमिटेशन सरफेसेस) सर्वे में उड़ान क्षेत्र में करीब 454 संरचनाएं चिन्हित की गयी हैं। इनमें भवन, मोबाइल टावर, पानी की टंकियां, मास्क लाइट, बिजली के खंभे समेत अन्य ऊंची संरचनाएं शामिल हैं। एएआई ने संबंधित विभागों से रिपोर्ट के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है।
नगर परिषद के 12 वार्डों में 83 संरचनाएं
ओएलएस सर्वे में रक्सौल नगर परिषद क्षेत्र की 83 संरचनाएं चिन्हित हुई हैं। ये वार्ड संख्या 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 9, 11, 12, 16 और 21 में हैं। इनमें 52 भवन, 18 मास्क लाइट, चार पानी की टंकियां, दो मंदिर और दो मस्जिद शामिल हैं। इसके अलावा रक्सौल रेलवे स्टेशन से जुड़ी पांच संरचनाएं भी उड़ान क्षेत्र में आने की जानकारी सामने आयी है।
मोबाइल टावरों को भी नोटिस
उड़ान क्षेत्र में आने वाले विभिन्न मोबाइल कंपनियों के टावर भी चिन्हित किए गए हैं। संबंधित कंपनियों को नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सभी चिन्हित संरचनाओं का संबंधित विभागों से सत्यापन होगा। इसके बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षित उड़ान के लिए जरूरी है ओएलएस सर्वे
ओएलएस यानी ऑब्स्टेकल लिमिटेशन सरफेसेस सर्वे एयरपोर्ट के आसपास विमान की सुरक्षित उड़ान के लिए संभावित बाधाओं की पहचान करता है। इसमें निर्धारित ऊंचाई सीमा में आने वाली इमारत, टावर, पानी की टंकी, बिजली के खंभे, पेड़ व अन्य संरचनाओं का आकलन किया जाता है, ताकि टेकऑफ और लैंडिंग सुरक्षित हो सके।
139 एकड़ जमीन अधिग्रहण अंतिम चरण में
रक्सौल एयरपोर्ट के लिए बिहार सरकार की ओर से करीब 139 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जमीन भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को सौंपने की तैयारी है।
सीमा पार कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम
रक्सौल के सामने नेपाल का वीरगंज प्रमुख औद्योगिक और कारोबारी केंद्र है। भारत-नेपाल व्यापार और आवागमन के महत्वपूर्ण गलियारे में स्थित रक्सौल एयरपोर्ट के विकसित होने से सीमावर्ती क्षेत्र को हवाई संपर्क मिलने की संभावना है। इससे व्यापार, पर्यटन, निवेश और दोनों देशों के बीच आवागमन को नई गति मिल सकती है।
