
रक्सौल।(Vor desk)।भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सामरिक रूप से संवेदनशील रक्सौल जंक्शन अब बाल तस्करों और मासूमों के शोषण में लगे गिरोहों के लिए पूरी तरह दुर्गम बनने जा रहा है। सरहद पार से होने वाली मानव तस्करी, बाल श्रम और रेलवे मार्ग के जरिए बच्चों के अवैध पलायन पर पूर्णविराम लगाने के लिए रेलवे प्रशासन, केंद्रीय सुरक्षा बलों और नागरिक संस्थाओं ने एक साझा ‘सुरक्षा चक्र’ तैयार किया है। शुक्रवार को रक्सौल स्टेशन अधीक्षक कार्यालय में आयोजित बाल सहायता समूह की एक उच्चस्तरीय समन्वय बैठक में इस बहुस्तरीय रणनीति पर मुहर लगाई गई। अंतरराष्ट्रीय सीमा की संवेदनशीलता को देखते हुए तय किया गया है कि अब सीमावर्ती क्षेत्रों से लेकर स्टेशन के अंतिम छोर तक एकीकृत निगरानी तंत्र काम करेगा।
इस नई रणनीति के तहत स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्मों और प्रवेश-निकास द्वारों पर आरपीएफ, जीआरपी और सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) की संयुक्त टीमें चौबीसों घंटे तैनात रहेंगी। विशेषकर अकेले, भटके हुए या संदिग्ध अवस्था में यात्रा कर रहे बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर तुरंत सुरक्षित घेरे में लिया जाएगा। ऐसे मामलों में बिना समय गंवाए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और बाल कल्याण समिति को सूचित कर बच्चों के त्वरित संरक्षण और पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही ट्रेनों और परिसर में सक्रिय बाल भिक्षावृत्ति गिरोहों के खिलाफ भी कड़ा अभियान चलाने पर सहमति बनी है।
बैठक में बाल कल्याण समिति के दिग्विजय कुमार, सीपीओ चन्दरदीप कुमार, चाइल्ड हेल्पलाइन की खुशबु कुमारी, स्वच्छ रक्सौल के रणजीत सिंह, न्याय नेटवर्क और ममता माहेर निवास सहित सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने भाग लिया। सभी सहभागियों ने एकसुर में यह संकल्प दोहराया कि अंतर-विभागीय समन्वय को और मजबूत बनाकर रक्सौल को बाल तस्करी के खिलाफ एक अभेद्य मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।
