Sunday, June 28

नेपाल के गृहमंत्री का इंडो नेपाल बॉर्डर पर सीक्रेट मिशन:बिहार सीमा पर भेष बदल कर गुप-चुप लिया सीमा का जायजा,मची खलबली!

काली टोपी, मास्क, चश्मा और हाफ टी-शर्ट ,हाफ पैंट पहनकर सीमा क्षेत्र पहुंचे गृहमंत्री गुरुङ ने रक्सौल सहित चंपारण से लगे नेपाल भारत सीमा का लिया जायजा

गृहमंत्री सुदन गुरुंग के औचक सीमा निरीक्षण से सुरक्षा एजेंसियों में हलचल, तस्करी पर स्थानीयों से ली जानकारी

रक्सौल से लगे वीरगंज के सिर्सिया बॉर्डर पर गृहमंत्री को स्थानीयों ने बताई तस्करी की हकीकत, सुरक्षाकर्मियों की मिलीभगत का लगाया आरोप

हाल ही में पूर्वी चंपारण के डीएम सौरभ सुमन यादव और एसपी स्वर्ण प्रभात के बॉर्डर निरीक्षण के बाद गृह मंत्री का दौरा चर्चे में

रक्सौल।(Vor desk)।नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरुङ द्वारा बिहार से लगे नेपाल के बारा और पर्सा जिले के विभिन्न बॉर्डर प्वाइंट का बिना पूर्व सूचना के वेश भूसा छुपा कर औचक निरीक्षण किए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हलचल मच गई है।सीमा समस्या को ले कर दोनों देशों के बीच असहज स्थिति के बीच लगातार सीमा बैठकों के दौर के बीच गृहमंत्री ने स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों को जानकारी दिए बिना सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया और स्थानीय लोगों से सीधे बातचीत कर कथित तस्करी के तौर-तरीकों तथा सुरक्षा कर्मियों की भूमिका को लेकर शिकायतें सुनीं।खुली सीमा का मुआयना किया।आवाजाही,रहन सहन,बॉर्डर पीलर की स्थिति भी गहन जायजा लिया।

जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के महाधिवेशन में भाग लेने के बाद गृहमंत्री गुरुङ शुक्रवार रात करीब नौ बजे सीधे बारा जिला के पथलैया पहुंचे। वहां से वे पूर्व-पश्चिम राजमार्ग के रास्ते पिलुवा होते हुए जीतपुर-सिमरा उपमहानगरपालिका के बड़हरवा क्षेत्र तक गए और बाद में सिमरा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कुछ स्थानीय नागरिकों से भी बातचीत की।

शुक्रवार रात सिमरा के एक सामान्य होटल में ठहरने के बाद गृहमंत्री ने शनिवार को वीरगंज के सहायक सीमा नाकों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वीरगंज के उन सीमा क्षेत्रों का दौरा किया, जिन्हें कथित तौर पर तस्करी के प्रमुख मार्गों में शामिल माना जाता है, जिनमें अलौं एवं सिरसिया जैसे सीमा नाके प्रमुख हैं। रक्सौल बॉर्डर के पनटोका पंचायत के पार गृह मंत्री ने काफी समय बिताया।इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से सीधे संवाद किया।इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें स्थानीय नागरिक गृहमंत्री को सीमा पर चल रही गतिविधियों की जानकारी देते दिखाई दे रहे हैं।

शनिवार दोपहर सिर्सिया पंटोका नाका पहुंचे गृहमंत्री गुरुङ से स्थानीय निवासी सुरेंद्र साह ने शिकायत करते हुए बताया कि उस समय भी भारत की ओर चार मोटरसाइकिलों पर तस्करी का सामान लदा हुआ खड़ा है और अधिकारियों के वहां से चले जाने के बाद वह सामान नेपाल में प्रवेश कर जाएगा। वीडियो में गृहमंत्री को शिकायत सुनने के बाद एक व्यक्ति को भारत की ओर जाकर स्थिति की जांच करने का निर्देश देते हुए देखा जा सकता है।जानकारी के अनुसार, सिर्सिया सीमा नाके की निगरानी सशस्त्र पुलिस बल के बीओपी ड्राइपोर्ट द्वारा की जाती है। इस क्षेत्र की जिम्मेदारी सशस्त्र पुलिस बल की 13वीं गण, वीरगंज के अंतर्गत आती है, जहां डीएसपी गोविंद केसी कमांडर के रूप में तैनात हैं।

इसी दौरान एक अन्य स्थानीय निवासी मुकेश साह ने सीमा पर लगे सीसीटीवी कैमरे और उसके पोल की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया कि इन्हीं कैमरों की आड़ में सशस्त्र पुलिस बल के एक डीएसपी की मिलीभगत से तस्करी कराई जाती है। इस पर गृहमंत्री ने पूछा कि सीसीटीवी कैमरों की निगरानी कहां से की जाती है, जिसके जवाब में स्थानीय लोगों ने बताया कि इसकी मॉनिटरिंग सशस्त्र पुलिस के कैंप से होती है।

बताया गया है कि गृहमंत्री ने पर्सा और बारा के स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से कोई समन्वय किए बिना अपने निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) के साथ निजी वाहन से पूरे दिन सीमा क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अपनी पहचान गोपनीय रखने के लिए कथित रूप से पांच बार वाहन भी बदले। वहीं, स्थानीय सुरक्षा एजेंसियां सड़क और सार्वजनिक स्थलों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से उनके आवागमन पर नजर बनाए हुए थीं। बताया जाता है कि इस दौरान उनके पीएसओ के मोबाइल फोन भी बंद थे।

काली टोपी, मास्क और काला चश्मा पहनकर पहुंचे गृहमंत्री गुरुङ ने टी-शर्ट और हाफ पैंट में सीमा क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने स्थानीय लोगों से विशेष रूप से साइकिल, मोटरसाइकिल और सिर पर सामान ढोकर की जाने वाली कथित तस्करी के तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी ली। स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि दिनदहाड़े होने वाली कथित तस्करी में कुछ सुरक्षा कर्मियों की मिलीभगत और संरक्षण होने के आरोप लंबे समय से लगाए जाते रहे हैं।

एक वीडियो में स्थानीय लोगों को सीमा क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों के पोल की ओर इशारा करते हुए यह शिकायत करते हुए सुना जा सकता है कि इनकी मौजूदगी के बावजूद अवैध गतिविधियां जारी रहती हैं। इस पर गृहमंत्री ने पूछा कि सीसीटीवी कैमरों की निगरानी कहां से की जाती है। जवाब में स्थानीय लोगों ने बताया कि इनकी निगरानी जिला प्रशासन कार्यालय के माध्यम से की जाती है।

शनिवार को पूरे दिन सीमा क्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद गृहमंत्री शाम करीब साढ़े पांच बजे सिमरा से अंतिम उड़ान के जरिए काठमांडू लौट गए। सिमरा हवाई अड्डे पर उन्होंने पर्सा और बारा के प्रमुख जिला अधिकारियों, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाकर सीमा क्षेत्र में हो रही तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश दिए।

उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा सीमा क्षेत्रों में आम नागरिकों के लिए 500 रुपये नेपाली मुद्रा से अधिक की खरीदारी पर सख्ती बरती जा रही है।नेपाल सरकार का जोर राजस्व बढ़ाने पर है।सीमा क्षेत्र के लिए इस नियम से बने मुश्किल हालातों के बीच सीमावर्ती इलाकों में कथित तस्करी जारी रहने को लेकर स्थानीय लोगों में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासी सोशल मीडिया के माध्यम से भी लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस मुद्दे ने सीमा सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।(रिपोर्ट:पीके गुप्ता)

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