Sunday, June 21

भारत-नेपाल सीमा पर नशे का काला कारोबार: रक्सौल में 25 हजार से अधिक एक्सपायर्ड नशीली दवाएं बरामद, नेपाल खपाने की थी तैयारी

रक्सौल (vor desk)। भारत-नेपाल सीमा पर अवस्थित रक्सौल और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्र इन दिनों नशीली दवाओं की तस्करी के सेफ जोन बनते जा रहे हैं। ताजा मामला हरैया थाना क्षेत्र का है, जहाँ पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में प्रतिबंधित और एक्सपायर्ड नशीली दवाएं बरामद की हैं। हालांकि, पुलिस की भनक लगते ही तस्कर मौके से फरार होने में कामयाब रहा।

ओवरब्रिज के नीचे पुलिस की छापेमारी, पैकेट फेंक भागा तस्कर

मामले की पुष्टि करते हुए हरैया थानाध्यक्ष किशन पासवान ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक अज्ञात तस्कर रक्सौल की ओर से भारी मात्रा में नशीली टैबलेट लेकर अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पार करने की फिराक में है।
सूचना के आलोक में पुलिस बल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बाइपास ओवरब्रिज के नीचे घेराबंदी की। पुलिस को आते देख तस्कर घबरा गया और पकड़े जाने के डर से सड़क किनारे दवाओं से भरा एक बड़ा पैकेट फेंककर अंधेरे का फायदा उठाते हुए रंगेहाथ फरार हो गया। जब पुलिस ने उक्त पैकेट की तलाशी ली, तो उसमें से *
25,300 पीस प्रतिबंधित नशीली टैबलेट बरामद हुईं।

सीमा पार ‘स्लो पॉइजन’ खपाने की बड़ी साजिश

इस बरामदगी ने भारत-नेपाल सीमाक्षेत्र में सक्रिय दवा तस्करों के एक बेहद खतरनाक नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय बाजारों में जो नशीली दवाएं एक्सपायर्ड हो जाती हैं या जिन्हें प्रतिबंधित कर दिया जाता है, उन्हें कौड़ियों के भाव खरीदकर नेपाल के सीमावर्ती जिलों (जैसे वीरगंज, बारा, पर्सा) में ऊंचे दामों पर खपाया जाता है। एक्सपायर्ड नशीली दवाएं एक तरह से ‘स्लो पॉइजन’ (धीमा जहर) का काम करती हैं, जो युवाओं की जिंदगी को सीधे तौर पर तबाह कर रही हैं।

बिना डॉक्टर के पर्चे की इतनी बड़ी खेप: उठ रहे गंभीर सवाल

इस पूरी बरामदगी के बाद स्थानीय स्वास्थ्य तंत्र और ड्रग विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:

बिना प्रिस्क्रइप्शन इतनी दवाएं कहाँ से आईं?

नियमतः ये प्रतिबंधित नशीली दवाएं बिना किसी अधिकृत डॉक्टर के पर्चे (Prescription) के नहीं बेची जा सकतीं। ऐसे में 25 हजार से अधिक टैबलेट्स का एक साथ मिलना यह दर्शाता है कि इसमें कुछ दवा विक्रेताओं या स्टॉकिस्टों की मिलीभगत हो सकती है।

एक्सपायर्ड स्टॉक को नष्ट क्यों नहीं किया गया?
नियमानुसार एक्सपायर्ड दवाओं को डिस्ट्रॉय (नष्ट) करना होता है, लेकिन इन्हें तस्करों तक पहुँचाया जा रहा है, जो सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों के लिए बड़ा खतरा है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती

खुली सीमा का फायदा उठाकर रक्सौल के रास्ते नेपाल में नशीली दवाओं की खेप भेजना कोई नई बात नहीं है, लेकिन एक्सपायर्ड दवाओं की इतनी बड़ी खेप का पकड़ा जाना बेहद चिंताजनक है। स्थानीय लोगों की मांग है कि पुलिस न सिर्फ कैरियर (दवा फेंककर भागने वाले) की तलाश करे, बल्कि इस रैकेट के मुख्य सरगना और दवा सप्लाई करने वाले मुख्य डिस्ट्रीब्यूटरों तक भी पहुंचे ताकि इस काले कारोबार की जड़ पर प्रहार किया जा सके।

क्या कहते है थानाध्यक्ष
“बरामद की गई सभी 25,300 नशीली टैबलेट्स प्रतिबंधित होने के साथ-साथ पूरी तरह एक्सपायर्ड (समय-सीमा समाप्त) हैं। पुलिस ने दवाओं को विधिवत जब्त कर लिया है और अज्ञात तस्कर के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”

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