
रक्सौल (VoR desk)। बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों का विस्तार करने के उद्देश्य से बिहार सरकार की उद्योग एवं खेल मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह गुरुवार को रक्सौल पहुंचीं। अपने दौरे के दौरान उन्होंने आमोदेई स्थित रिपुराज एग्रो प्राइवेट लिमिटेड (रिपु राइस) सहित शिवम ग्रुप और शिव शक्ति एग्रो प्राइवेट लिमिटेड की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण कर उत्पादन व्यवस्था, विस्तार योजनाओं और रोजगार सृजन की संभावनाओं का जायजा लिया।
औद्योगिकीकरण पर विशेष जोर
मंत्री श्रेयसी सिंह का यह दौरा सीमावर्ती क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने और नई परियोजनाओं की संभावनाओं का आकलन करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार उद्योग आधारित विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों को औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि उद्योगों का विस्तार न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि किसानों, व्यापारियों और युवाओं के लिए भी नए अवसर पैदा करेगा।
रिपुराज एग्रो के मेगा विस्तार प्लान की जानकारी
आमोदेई स्थित रिपुराज एग्रो प्राइवेट लिमिटेड में कंपनी के निदेशक रिपु रमन और प्रबंध निदेशक आर.पी. गुप्ता ने पीपीटी के माध्यम से मंत्री को प्रस्तावित परियोजनाओं और विस्तार योजनाओं की जानकारी दी। कंपनी की ओर से प्रस्तावित एथनॉल प्लांट, आधुनिक राइस मिल और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया।
मंत्री ने इन योजनाओं को सीमावर्ती क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि ऐसे निवेश बिहार को औद्योगिक दृष्टि से नई पहचान प्रदान करेंगे।
शिवम ग्रुप की विभिन्न इकाइयों का किया निरीक्षण
दौरे के क्रम में मंत्री ने रक्सौल के प्रतिष्ठित औद्योगिक प्रतिष्ठान शिवम ग्रुप की विभिन्न इकाइयों का भी निरीक्षण किया। इनमें शिवम रोलर फ्लावर मिल, शिवम कोल्ड स्टोरेज, शिवम राइस मिल, शिवम रिफाइनरी तथा शिव शक्ति एग्रो प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
शिवम ग्रुप के निदेशक मधुसूदन गुप्ता और रिपुसूदन गुप्ता के नेतृत्व में संचालित ये इकाइयां कृषि आधारित उद्योगों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।शहर के लक्ष्मीपुर में संचालित समूह के विभिन्न प्रतिष्ठानों में आटा, चावल, खाद्य तेल तथा अन्य कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण का कार्य किया जाता है।

निरीक्षण के क्रम में स्वागत समारोह में प्रबंधन की ओर से मंत्री को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सुशीला देवी एवं मुस्कान सुधन की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
शिव शक्ति एग्रो का भी निरीक्षण
वहीं,गम्हरिया चौक में मुख्य पथ स्थित शिव शक्ति एग्रो प्राइवेट लिमिटेड का भी मंत्री श्रेयसी सिंह ने निरीक्षण किया ।यहां मुर्गी दाना (पोल्ट्री फीड) समेत अन्य पशु आहार उत्पादों का निर्माण किया जाता है, जिनकी आपूर्ति बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों में की जाती है।

शिव शक्ति एग्रो में कंपनी के प्रबंध निदेशक राजू गुप्ता ने मंत्री का स्वागत किया। इस अवसर पर प्रमुख उद्योगपति संजय गुप्ता और डॉ. सुजीत कुमार समेत कई वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।
सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का वादा
औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण करने के बाद मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों के विकास के लिए सकारात्मक और संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ काम कर रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि उद्योगों के विस्तार और नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक, तकनीकी और नीतिगत स्तर पर आवश्यक हर सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार में निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है और सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक उद्योग सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थापित हों।
रोजगार सृजन और आर्थिक मजबूती पर दिया बल
मंत्री ने कहा कि कृषि आधारित उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इनके विस्तार से किसानों को बेहतर बाजार तथा युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होगा। उन्होंने शिवम ग्रुप,शिव शक्ति एग्रो और रिपुराज एग्रो द्वारा क्षेत्र में किए जा रहे निवेश और रोजगार सृजन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे उद्योग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों के जीवन से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन परियोजनाओं के विस्तार से हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकते हैं, जिससे सीमावर्ती क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी और रक्सौल बिहार के उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।
मंत्री ने उद्योगपतियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र के समन्वित प्रयास से ही विकसित बिहार और आत्मनिर्भर सीमावर्ती क्षेत्र के लक्ष्य को साकार किया जा सकता है।
