
रक्सौल।(Vor desk)। आठ साल पहले फेसबुक पर शुरू हुई दोस्ती प्यार में बदली, फिर हजारों किलोमीटर की दूरी पार कर म्यांमार की युवती अपने प्रेमी के पास बिहार पहुंच गई। दोनों ने साथ जीवन बिताने का सपना देखा, लेकिन नेपाल सीमा पर हुई एक नियमित जांच ने उनकी कहानी को सुरक्षा एजेंसियों की जांच का विषय बना दिया। अब इस प्रेम कहानी के साथ-साथ भारतीय पहचान पत्र, आधार कार्ड और विदेशी नागरिक से जुड़े नियमों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल के मैत्री पुल पर शनिवार शाम करीब साढ़े छह बजे एसएसबी और इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा की जा रही नियमित जांच के दौरान नेपाल की ओर जा रहे एक युवक और एक महिला को रोककर पूछताछ की गई। युवक ने अपनी पहचान सीतामढ़ी जिले के मेजरगंज थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर निवासी 27 वर्षीय मोहम्मद सद्दाम मंसूरी के रूप में बताई, जबकि महिला को उसने अपनी पत्नी अंजूम खातून बताया।
हालांकि पूछताछ के दौरान सुरक्षा कर्मियों को दोनों के जवाबों पर संदेह हुआ। महिला के मोबाइल फोन की जांच में म्यांमार का पासपोर्ट मिलने के बाद कहानी का नया पहलू सामने आया। इसके बाद महिला की वास्तविक पहचान म्यांमार के यांगून की रहने वाली 23 वर्षीय बूमा देवी के रूप में हुई।
रक्सौल एसडीपीओ मनीष आनंद ने हरैया थाना में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर दोनों को हिरासत में लेकर विस्तृत पूछताछ की गई। प्रारंभिक जांच में पता चला कि वर्ष 2018 में दोनों की पहचान फेसबुक के जरिए हुई थी। सद्दाम मंसूरी सोशल मीडिया पर “सोनू बाबू” नाम से सक्रिय था, जबकि युवती “अनुष्का बसनेत” नाम की आईडी का इस्तेमाल करती थी। बातचीत बढ़ी और दोनों के बीच प्रेम संबंध स्थापित हो गए।
पुलिस के अनुसार वर्ष 2022 में बूमा देवी ने पासपोर्ट बनवाया और बाद में थाईलैंड चली गई, जहां वह फुकेट शहर के एक रेस्टोरेंट में काम करने लगी। इस दौरान दोनों के बीच लगातार संपर्क बना रहा। विवाह का निर्णय लेने के बाद युवती ने भारत आने की प्रक्रिया पूरी की और 17 जनवरी 2026 को मुंबई पहुंची, जहां सद्दाम उसे लेने गया। दोनों कुछ समय सूरत में रहने के बाद रघुनाथपुर गांव आ गए।
पूछताछ में दोनों ने विवाह करने की बात स्वीकार की है, लेकिन जांच एजेंसियां अब विवाह से संबंधित कानूनी दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की भी जांच कर रही हैं। सबसे गंभीर पहलू महिला के नाम से बनाए गए भारतीय पहचान दस्तावेजों को लेकर सामने आया है। जांच में यह बात सामने आई है कि उसके नाम से आधार कार्ड सहित अन्य पहचान पत्र भी तैयार कराए गए थे। अब यह पता लगाया जा रहा है कि विदेशी नागरिक के नाम पर ये दस्तावेज किस आधार पर बने, सत्यापन कैसे हुआ और इसमें किस-किस की भूमिका रही।
शुरुआत में दोनों ने नेपाल जाने का कारण पारिवारिक कार्यक्रम बताया था, लेकिन बाद की पूछताछ में अधिकारियों को जानकारी मिली कि वे नेपाल के रास्ते थाईलैंड जाने की तैयारी में थे। यात्रा से जुड़े दस्तावेजों और उद्देश्य के संबंध में स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
हरैया थानाध्यक्ष किशन कुमार पासवान ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है। जांच का दायरा यह पता लगाने तक बढ़ाया गया है कि क्या किसी अन्य व्यक्ति ने दस्तावेज तैयार कराने या पूरी प्रक्रिया में सहयोग किया था।
प्रेम और विश्वास से शुरू हुई यह कहानी अब सीमा सुरक्षा, विदेशी नागरिकों के निवास नियमों और पहचान दस्तावेजों की वैधता जैसे अहम सवालों के बीच जांच एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण मामला बन गई है। जांच पूरी होने के बाद ही इस अंतरराष्ट्रीय प्रेम कहानी की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
