
वीरगंज।(Vor desk)। त्रिभुवन राजपथ के विस्तार को लेकर वीरगंज में तनाव की स्थिति और गहरी हो गई है, जहाँ स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने सरकारी कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वीरगंज बचाओ संघर्ष समिति और वीरगंज युवा तथा व्यापारी सड़क पीड़ित संघर्ष समिति के बैनर तले गुरुवार को एकजुट हुए सैकड़ों लोगों ने आदर्शनगर चौक से घंटाघर चौक तक एक विशाल मानव श्रृंखला बनाई। इस प्रदर्शन के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने ‘बुलडोजर आतंक’ को तत्काल रोकने और मुख्य बाजार क्षेत्र को राजमार्ग के बजाय ‘शहरी मार्ग’ के मानदंडों पर विकसित करने की पुरजोर मांग की है।
विवाद का मुख्य केंद्र सड़क विभाग और वीरगंज महानगरपालिका द्वारा पिछले 19 और 20 अप्रैल को की गई वह कार्रवाई है, जिसमें गण्डक से मैत्री पुल तक सड़क के दोनों ओर 25-25 मीटर के दायरे में आने वाली संरचनाओं को ढहा दिया गया था। प्रशासन द्वारा सड़क के केंद्र बिंदु से निशान लगाए जाने और घर स्वामियों को अपनी शेष संरचनाएं स्वयं हटाने की चेतावनी दिए जाने के बाद जन-आक्रोश फूट पड़ा है। वीरगंज बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक जवाहर प्रसाद गुप्ता ने सरकार की इस नीति की आलोचना करते हुए कहा कि जब शहर में पहले से ही दो बाईपास और एक 6-लेन का व्यापारिक मार्ग उपलब्ध है, तो ऐतिहासिक मुख्य बाजार को उजाड़ने का कोई तर्क नहीं बनता। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र होगा।
इस जन-आंदोलन को वीरगंज के पूर्व मेयर विजय सरावगी का भी समर्थन मिला है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि विकास के नाम पर दशकों पुराने वैध निर्माणों को बिना किसी मुआब्जे, वैज्ञानिक अध्ययन या वैकल्पिक व्यवस्था के तोड़ना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि इस योजना से 8 किलोमीटर के दायरे में आने वाली लगभग 1,200 पक्की संरचनाएं प्रभावित होंगी, जो न केवल वीरगंज की आर्थिक कमर तोड़ देगा बल्कि इसकी ऐतिहासिक पहचान को भी मिटा देगा। उल्लेखनीय है कि आंदोलनकारी पहले भी जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री बालेन शाह को ज्ञापन सौंपने और काठमांडू के माइतीघर मंडला में प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद कर चुके हैं, लेकिन सरकार के अड़ियल रुख ने स्थानीय समुदायों में भारी असुरक्षा पैदा कर दी है।
