Thursday, April 23

रक्सौल हवाई अड्डा: विस्तार की राह में मुआवजे का रोड़ा, समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर मंथन शुरू,जन प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक


​रक्सौल।(Vor desk)। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित रक्सौल हवाई अड्डे को ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ के रूप में धरातल पर उतारने की तैयारी अब निर्णायक मोड़ पर है। हवाई अड्डे के विस्तार के लिए आवश्यक 139 एकड़ अतिरिक्त भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से अनुमंडल पदाधिकारी मनीष कुमार ने प्रखंड मुख्यालय में समीक्षा बैठक की। इस बैठक में प्रखंड प्रमुख श्याम पटेल, उप प्रमुख शंभू दास, बीडीओ जय प्रकाश और अंचल अधिकारी शेखर राज सहित संबंधित पंचायतों के मुखिया शामिल हुए। प्रशासन का मुख्य जोर उन रैयतों को प्रेरित करने पर है जिन्होंने अब तक मुआवजे के लिए आवेदन नहीं दिया है, ताकि भुगतान की प्रक्रिया जल्द शुरू कर निर्माण कार्य की बाधाएं दूर की जा सकें।


​जमीन अधिग्रहण की इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती पनटोका पंचायत के भरतमही गांव से आ रही है, जहां मुआवजे की दरों को लेकर गहरा गतिरोध बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में भूमि की दर 4.71 लाख रुपये प्रति कट्ठा निर्धारित की गई है, जबकि पंचायत के अन्य हिस्सों में अधिग्रहित हो रही भूमि की कीमत 15 लाख रुपये प्रति कट्ठा तक बताई जा रही है। दरों में इस भारी अंतर और ‘घरायशी’ बनाम ‘खेतिहर’ भूमि के वर्गीकरण को लेकर रैयतों में असंतोष है। यही कारण है कि इस गांव के 23 प्रमुख रैयतों में से आधे से अधिक ने अभी तक अपने आवेदन जमा नहीं किए हैं।मुआवजे में भेद भाव को ले कर विरोध प्रदर्शन भी हो चुका है,समान दर भुगतान की मांग होती आ रही है।


​इस तकनीकी और आर्थिक गतिरोध पर कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि विकास की गति नहीं रुकनी चाहिए। स्थानीय अधिवक्ता उमेश चौरसिया ने रैयतों को परामर्श दिया है कि वे अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए मुआवजा स्वीकार कर लें। उन्होंने उदाहरण दिया कि पूर्व में भी इस क्षेत्र के अन्य प्रोजेक्ट्स में रैयतों ने आपत्ति के साथ भुगतान लिया और बाद में न्यायालय के माध्यम से वाजिब हक प्राप्त किया। इससे एक तरफ जहां निर्माण कार्य सुचारू रूप से चलता रहेगा, वहीं दूसरी तरफ रैयतों के लिए कानूनी रास्ते भी खुले रहेंगे।उप प्रमुख शंभू दास ने भी स्वीकार किया कि असंतोष है,जिस पर प्रशासन को उच्च स्तरीय पहल की जरूरत है।


बता दे कि ​परियोजना की गंभीरता को देखते हुए बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और डीजीपी विनय कुमार ने भी बीते दिनों एसएसबी 47वीं बटालियन मुख्यालय में उच्च स्तरीय सुरक्षा और विकास कार्यों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को दो-टूक निर्देश दिया है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को अविलंब पूरा किया जाए। सरकार की इस सक्रियता से साफ है कि रक्सौल एयरपोर्ट का निर्माण अब सर्वोच्च प्राथमिकता पर है। प्रशासन की कोशिश है कि विगत कई माह से लंबित हो रहे मामले में संवाद और समन्वय के जरिए रैयतों के संशय को दूर किया जाए और जल्द से जल्द रनवे विस्तार का काम शुरू हो सके।

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