
विकास की राह में उजड़े सैकड़ों परिवार, विरोध पर लाठीचार्ज; पुनर्वास व मुआवजे पर उठे सवाल
वीरगंज। (नेपाल)।(Vor desk). 19अप्रैल 2026
नेपाल की आर्थिक राजधानी वीरगंज में रविवार को बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई, जिसने एक ओर वर्षों से लंबित सड़क चौड़ीकरण परियोजना को गति दी, तो दूसरी ओर सैकड़ों परिवारों को बेघर कर दिया। नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में सुबह करीब पांच बजे से मेन रोड पर 13 बुलडोजर और एक्सकेवेटर उतारे गए। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार इस अभियान में करीब 1200 निजी मकान और 29 सरकारी कार्यालय ध्वस्त किए जा रहे हैं।
कार्रवाई त्रिभुवन राजपथ के उस हिस्से में की जा रही है, जो मैत्री पुल से गंडक चौक तक फैला है। सड़क के केंद्र से दोनों ओर 25-25 मीटर (कुल 50 मीटर) क्षेत्र को खाली कराया जा रहा है। इस अभियान में नेपाल टेलीकॉम और मधेश विश्वविद्यालय सहित कई सरकारी संस्थानों के भवन भी प्रभावित हुए हैं। बिजली और इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बाधित रहीं।
13 साल पुरानी कानूनी लड़ाई का अंत
यह मामला वर्ष 2012 से न्यायालय में लंबित था। सर्वोच्च अदालत की न्यायाधीश विनोद शर्मा और महेश शर्मा पौडेल की संयुक्त पीठ ने 12 मार्च 2026 को सड़क विभाग के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सभी रिट याचिकाएं खारिज कर दी थीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि राजपत्र में निर्धारित सीमा के भीतर किए गए निर्माण अवैध हैं और “जग्गा प्राप्ति ऐन 1977” के तहत मुआवजे का दावा स्वीकार्य नहीं है।
इससे पहले वर्ष 2025 में भी कार्रवाई शुरू हुई थी, लेकिन विरोध के बाद अदालत ने उस पर रोक लगा दी थी। हालिया विस्तृत आदेश जारी होने के बाद प्रशासन ने पुनः सख्त कदम उठाया।
रातभर चला खाली कराने का सिलसिला
शनिवार शाम अचानक माइकिंग कर लोगों को 24 घंटे के भीतर मकान खाली करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद पूरी रात लोग अपने घरों और दुकानों से सामान निकालते रहे। कई व्यापारियों ने जल्दबाजी में स्टॉक हटाने के लिए भारी छूट पर सामान बेचा। बुजुर्गों और महिलाओं के बीच गहरा आक्रोश और पीड़ा देखी गई, जो अपने पुश्तैनी घरों को टूटते देख भावुक हो उठे।
स्थानीय नागरिकों—कन्हैया लाल केशरी,प्रमोद गुप्ता और दीपेंद्र रौनियार समेत कई लोगों—ने बिना पर्याप्त समय दिए की गई कार्रवाई को अमानवीय बताया।
विरोध पर बल प्रयोग
कार्रवाई के दौरान विरोध भी हुआ। वीरगंज बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष सह वार्ड पार्षद जवाहर गुप्ता के नेतृत्व में लोगों ने इसे रोकने की मांग की थी। पूर्व मधेश प्रदेश सांसद जन्नत अंसारी जब समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और हस्तक्षेप की कोशिश की, तो सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ दिया।
पूरे क्षेत्र में नेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स, नेपाल पुलिस और नगर पुलिस की भारी तैनाती रही।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है।
पूर्व मेयर विजय सरावगी का मकान भी ध्वस्त हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई “दमनकारी और बदले की भावना से प्रेरित” है तथा लोगों को संभलने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उन्होंने इसे “आतंकी कार्रवाई” तक करार दिया और पुनर्वास व मुआवजे की व्यवस्था नहीं होने पर सवाल उठाए।
वहीं, वीरगंज के मेयर राजेश मान सिंह ने इसे शहर के विकास के लिए “ऐतिहासिक कदम” बताया और कहा कि अभियान लगातार जारी रहेगा।
पूर्व कानून मंत्री अजय चौरसिया और पूर्व संविधान सभा सदस्य अजय द्विवेदी ने भी कार्रवाई के तौर-तरीकों पर सवाल उठाते हुए इसे “गुंडा शैली” करार दिया। मानवीय पहलुओं की अनदेखी का आरोप लगाया
विकास बनाम विस्थापन की बहस
प्रशासन इसे शहर के बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में आवश्यक कदम बता रहा है, जबकि प्रभावित परिवार इसे अपने जीवन पर आई आपदा मान रहे हैं। जिन लोगों के घर और रोजगार एक साथ खत्म हो गए, उनके सामने अब पुनर्वास और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
फिलहाल, भारी सुरक्षा के बीच वीरगंज में बुलडोजर कार्रवाई जारी है और शहर विकास तथा मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन को लेकर एक बड़े विमर्श के केंद्र में आ गया है।
