
पार्षदों के दबाव के आगे झुका प्रशासन; कार्यवाहक सभापति और असंतुष्ट गुट के बीच आर-पार की जंग के आसार
रक्सौल।(Vor desk)।
नगर परिषद रक्सौल में पिछले नौ महीनों से जारी प्रशासनिक गतिरोध और राजनीतिक खींचतान के बीच आखिरकार विकास कार्यों की फाइलें धूल झाड़ने के लिए तैयार हैं। कार्यवाहक नगर सभापति पुष्पा देवी के निर्देशानुसार आगामी 22 अप्रैल को दोपहर 02:30 बजे सशक्त स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। नगर सरकार भवन (वार्ड नंबर-01) के कार्यालय प्रकोष्ठ में आयोजित होने वाली इस बैठक को लेकर नगर कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. मनीष कुमार ने आधिकारिक सूचना जारी कर दी है।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब नगर परिषद भ्रष्टाचार के आरोपों और आपसी कलह के दौर से गुजर रहा है। पिछले साल अगस्त में तत्कालीन मुख्य पार्षद धुरपति देवी की भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामले में हुई बर्खास्तगी के बाद से ही शहर की सरकार अस्थिरता का सामना कर रही है।नगर परिषद के मुख्य पार्षद के रिक्त पद पर उप चुनाव की तैयारी चल रही है । जबकि,हाल ही में नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा 18अप्रैल को होने वाले नई समिति के चुनाव को अगले आदेश तक स्थगित किए जाने के कारण, वर्तमान समिति को ही ‘यथास्थिति’ बरकरार रखते हुए कार्य जारी रखने का निर्देश दिया गया है।हालांकि, घनश्याम प्रसाद के पत्र के जवाब में 6अक्टूबर2025 को कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी ने पूर्व में स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा था कि जब तक सदस्यों का लोकतांत्रिक चयन नहीं होता, तब तक पुरानी मनोनीत समिति की बैठक बुलाना वैधानिक रूप से उचित नहीं है।
पार्षदों ने खोला मोर्चा, बताया अपनी नैतिक जीत
इस बैठक की घोषणा को सशक्त स्थायी समिति के सदस्य सह वार्ड पार्षद घनश्याम प्रसाद ने अपनी बड़ी नैतिक जीत करार दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर कार्यवाहक सभापति पर नियमों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन जानबूझकर बैठक टाल रहा था। श्री प्रसाद के अनुसार, उन्होंने इस मामले को लेकर नगर विकास विभाग और जिला प्रशासन के पास शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके दबाव में आकर अब बैठक आहूत की गई है। इस बैठक में पार्षद अन्तिमा देवी और डिम्पल चौरसिया भी सदस्य के रूप में शामिल होकर अपनी बात रखेंगी।
पेयजल और सफाई जैसे 6 गंभीर मुद्दों पर होगी चर्चा
सोमवार को होने वाली इस बैठक के लिए कुल छह मुख्य विचारणीय बिंदु तय किए गए हैं। शहर में गहराते भीषण पेयजल संकट और पिछले वर्षों में लगाए गए समरसेबल पंपों की वर्तमान स्थिति की जांच इस बैठक का मुख्य एजेंडा रहेगी। इसके अतिरिक्त, शहर की लचर साफ-सफाई व्यवस्था, लंबित विकास योजनाओं की प्रगति समीक्षा और सौंदर्यीकरण के प्रस्तावों पर भी मुहर लगनी है। नगर कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. मनीष कुमार ने स्पष्ट किया है कि जब तक नए चुनाव नहीं होते, पुरानी समिति ही शहर के विकास के लिए उत्तरदायी रहेगी।हालाकि,कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी से संपर्क नहीं होने की वजह से उनका पक्ष नहीं मिल सका।
हंगामेदार रह सकती है बैठक
जानकारों की मानें तो 22 अप्रैल की यह बैठक शांतिपूर्ण रहने की उम्मीद कम ही है। बर्खास्तगी और गुटबाजी के कारण पार्षदों के बीच जो अविश्वास पैदा हुआ है, उसका सीधा असर सदन की कार्यवाही पर पड़ सकता है। विपक्ष जहां पिछले नौ महीनों के हिसाब-किताब पर सभापति को घेरने की तैयारी में है, वहीं कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी के लिए अपनी विश्वसनीयता साबित करने की बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल, शहर की जनता की निगाहें इस बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि इसी के फैसले पर रक्सौल के भविष्य के विकास कार्यों की रूपरेखा निर्भर करती है।
