Thursday, April 23

बिहार सुपर 50 परीक्षा में रक्सौल का जलवा: नीरज को मिला प्रदेश में प्रथम स्थान, सिमरन छठी पायदान पर


​रक्सौल।(Vor desk)। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘सुपर 50’ योजना की द्वितीय चरण की परीक्षा में रक्सौल के मेधावी विद्यार्थियों ने सफलता का नया इतिहास रच दिया है। स्थानीय एस.ए.भी. (SAV) स्कूल के दो होनहार छात्रों ने राज्य स्तरीय मेधा सूची में शीर्ष स्थानों पर कब्जा जमाकर न केवल अपने विद्यालय, बल्कि पूरे रक्सौल अनुमंडल का मान बढ़ाया है। इस परीक्षा में भगवानपुर कौरिहर निवासी शंभु यादव एवं भवानी देवी के पुत्र नीरज कुमार ने अपनी कुशाग्र बुद्धि और कठिन परिश्रम के बल पर पूरे बिहार में प्रथम स्थान प्राप्त कर सबको गौरवान्वित किया है। नीरज की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि संकल्प और सही दिशा में किए गए प्रयास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
​सफलता का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका, बल्कि नागा रोड रक्सौल की सिमरन कुमारी ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए राज्य स्तर पर छठा स्थान हासिल किया। निरंजन कुमार और मंजू देवी की पुत्री सिमरन ने अपनी इस सफलता से महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के प्रति रक्सौल के बदलते परिवेश का उदाहरण पेश किया है। बिहार सरकार द्वारा संचालित ‘सुपर 50’ योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के सबसे होनहार 50 छात्रों को चुनकर उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष रूप से तैयार करना है, ताकि वे भविष्य में देश की उच्च सेवाओं में अपना योगदान दे सकें। इन छात्रों का चयन एक अत्यंत कठिन प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से हुआ है, जो इनके संघर्ष और शैक्षणिक स्तर को दर्शाता है।
​विद्यार्थियों की इस गौरवमयी उपलब्धि पर एस.ए.भी. स्कूल परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई। विद्यालय के व्यवस्थापक अरविंद कुमार सिंह और अशोक कुमार सिंह ने छात्रों को मिठाई खिलाकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इन बच्चों की सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। इस अवसर पर प्रधानाध्यापक साईमन रेक्स, उप-प्रधानाचार्य विक्टर डेका सहित वरिष्ठ शिक्षक कुंदन राज, मंदीप कुमार, इंद्र सर्राफ, रामभरोस और एस. पी. यादव सर ने भी बधाई दी। शिक्षकों ने कहा कि नीरज और सिमरन ने अपनी मेहनत से यह सिद्ध कर दिया है कि संसाधनों की कमी कभी प्रतिभा के आड़े नहीं आती। सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि इन बच्चों ने रक्सौल को शिक्षा के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई है।

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