
रक्सौल।(Vor desk)।अपनी छह सूत्री मांगों को लेकर वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रहे रक्सौल नगर परिषद के सफाई कर्मियों ने सोमवार को नगर प्रशासन और सरकार के विरुद्ध हुंकार भरी। बिहार लोकल बॉडीज इम्प्लाइज फेडरेशन और बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत शहर के मुख्य पथ स्थित सुविधा केंद्र से हुई, जहां भारी संख्या में जुटे सफाई कर्मियों ने जमकर नारेबाजी की। इसके पश्चात कर्मियों का जत्था एक विशाल जुलूस के रूप में अनुमंडल कार्यालय पहुंचा, जिससे पूरे शहर में सफाई कर्मियों की एकजुटता का संदेश गया।
अनुमंडल कार्यालय में रक्सौल नगर परिषद कर्मचारी यूनियन के नेता विनोद मल्लिक के नेतृत्व में अधिकारियों को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा गया। इस ज्ञापन में संविदा और दैनिक सफाई कर्मियों की सेवा नियमित करने, आउटसोर्सिंग व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने और सफाई कर्मियों को निकाय कर्मी घोषित करने की प्रमुख मांगें उठाई गई हैं। इसके अलावा समान काम के लिए समान वेतन, अनुकंपा के आधार पर लंबित नियुक्तियों को जल्द पूर्ण करने, सातवें वेतनमान का लाभ देने और कर्मचारियों के लिए आजीवन पेंशन की व्यवस्था सुनिश्चित करने जैसी गंभीर समस्याओं को रेखांकित किया गया है। कर्मियों ने साफ किया कि वे अब केवल आश्वासनों के भरोसे बैठने को तैयार नहीं हैं।
आंदोलन का मार्गदर्शन कर रहे संयुक्त मोर्चा के महासचिव चंद्रशेखर कुमार ने सरकार को कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि वर्तमान में मोर्चा केवल नई सरकार के गठन की प्रक्रिया के कारण धैर्य बनाए हुए है। उन्होंने रणनीति साझा करते हुए बताया कि जल्द ही इस विषय पर पटना में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी, जिसके बाद संघ का प्रतिनिधिमंडल नवनियुक्त सरकार के समक्ष अपनी बातें रखेगा। महासचिव ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार के साथ वार्ता विफल रहती है, तो पूरे बिहार में राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन के दौरान राजेश मल्लिक, महेंद्र कुशवाहा, पीताम्बर यादव, भिखारी मल्लिक, बिहारी मल्लिक और विंध्याचल मल्लिक जैसे प्रमुख कार्यकर्ता मौजूद रहे। वहीं महिला कर्मचारियों में सीता देवी और प्रमिला देवी के नेतृत्व में दर्जनों सफाई कर्मियों ने अपनी आवाज बुलंद की। सफाई कर्मियों के इस उग्र रुख को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो शहर की सफाई व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। कर्मियों ने एक स्वर में कहा कि वे अपने हक की लड़ाई को अंतिम परिणाम तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
