
रक्सौल (पूर्वी चंपारण)।(Vor desk)।: गर्मी का मौसम शुरू होते ही बच्चों के लिए काल बनने वाले एईएस (चमकी बुखार) और जेई के खतरों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में पूर्वी चंपारण के जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. शरत चंद्र शर्मा ने रक्सौल अनुमंडल अस्पताल का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान जहां एक ओर तैयारियों को पुख्ता करने के निर्देश दिए गए, वहीं ड्यूटी में लापरवाही बरतने वालों पर गाज भी गिरी।
निरीक्षण में खुली पोल: केंद्र पर लटका था ताला
समीक्षा दौरे के दौरान डॉ. शर्मा ने पीएचसी प्रभारी डॉ. राजीव रंजन कुमार के साथ विभिन्न केंद्रों का जायजा लिया। इस क्रम में जोकियारी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की व्यवस्था बेहद निराशाजनक पाई गई। ड्यूटी के समय सीएचओ (CHO) सपना राज केंद्र से नदारद मिलीं और स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लटका हुआ था। इस घोर लापरवाही पर जिला पदाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के संकेत दिए।
अस्पताल में पुख्ता इंतजाम के निर्देश
अनुमंडल अस्पताल के निरीक्षण के दौरान डॉ. शर्मा ने अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. स्वाति सपन और स्वास्थ्य प्रबंधक आशीष कुमार को वार्डों में जीवन रक्षक दवाओं और उपकरणों को हर वक्त दुरुस्त रखने का आदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपात स्थिति में बच्चों के उपचार में कोई देरी नहीं होनी चाहिए।
टीकाकरण और सर्वाइकल कैंसर से बचाव पर जोर
डॉ. शर्मा ने टीकाकरण कक्ष की समीक्षा करते हुए किशोरियों के लिए ‘गाडा सील’ (HPV) वैक्सीन की प्रगति पर विशेष चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिया कि:
- 14 से 15 वर्ष की वैसी किशोरियां जिन्हें अब तक एचपीवी वैक्सीन नहीं मिली है, उन्हें प्राथमिकता दी जाए।
- अभिभावकों के बीच फैली भ्रांतियों को दूर कर उन्हें जागरूक किया जाए।
- जटियाही आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 181 पर चल रहे टीकाकरण की उन्होंने सराहना की, जहां एएनएम खुशबू और अनिता ने 8 किशोरियों का टीकाकरण किया था।
अभिभावकों के लिए ‘जीवन रक्षक’ सलाह
डॉ. शरत चंद्र शर्मा ने बताया कि अप्रैल से अगस्त के बीच चमकी बुखार का खतरा सबसे अधिक रहता है। उन्होंने ग्रामीणों और शहरी क्षेत्र के लोगों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की अपील की है:
- खाली पेट न सोएं: रात में बच्चों को कभी भी खाली पेट न सोने दें, उन्हें कुछ मीठा खिलाकर सुलाएं।
- धूप से बचाव: 6 माह से 15 वर्ष तक के बच्चों को तेज धूप के संपर्क में आने से बचाएं।
- त्वरित उपचार: शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचें। मरीजों के लिए 24 घंटे निःशुल्क एंबुलेंस सेवा उपलब्ध है।
- निजी वाहन पर प्रोत्साहन: यदि कोई अपने निजी वाहन से मरीज को अस्पताल लाता है, तो सरकार की ओर से दूरी के आधार पर उन्हें नकद भुगतान किया जाएगा।
