
काठमांडू/वीरगंज।(Vor desk)।
नेपाल की राजनीति में आज उस समय एक ऐतिहासिक और अप्रत्याशित मोड़ आ गया, जब नवनियुक्त सरकार के आदेश पर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को शनिवार तड़के गिरफ्तार कर लिया गया। काठमांडू उपत्यका अपराध अनुसंधान कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि रमेश लेखक को उनके भक्तपुर स्थित कटुन्जे निवास से हिरासत में लिया गया, जबकि एमाले अध्यक्ष ओली को उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। यह पूरी कार्रवाई पिछले वर्ष हुए ‘जेन-जी’ (Gen-Z) आंदोलन के दौरान हुए हिंसक दमन और नागरिकों की मौत के मामले में की गई है।
आधी रात की रणनीतिक तैयारी और गिरफ्तारी सूत्रों के अनुसार, बालेन्द्र साह के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के ठीक बाद हुई पहली कैबिनेट बैठक ने गौरी बहादुर कार्की के नेतृत्व वाले जाँच आयोग की प्रतिवेदन (रिपोर्ट) को तत्काल कार्यान्वयन में लाने का निर्णय लिया था। इस निर्णय के साथ ही गृहमंत्री सुधन गुरुङ शुक्रवार पूरी रात सुरक्षा निकायों के प्रमुखों के साथ गहन मंथन में जुटे रहे। शुरुआती तौर पर पुलिस ने सरकार से लिखित आदेश की मांग की थी, जिसके बाद मध्य रात्रि में कानून सचिव पाराश्वर ढुंगाना को पुलिस मुख्यालय (नक्साल) बुलाया गया। लिखित आदेश तैयार होते ही पुलिस ने ‘जरूरी गिरफ्तारी वारंट’ जारी किया और तड़के दोनों बड़े नेताओं को उनके आवास से उठा लिया।
कानूनी आधार और आयोग की सिफारिश यह गिरफ्तारी पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को सौंपी गई उस जाँच रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें सितम्बर2025 के आंदोलन के दौरान हुए दमन की विस्तृत व्याख्या की गई है। रिपोर्ट में तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, गृहमंत्री रमेश लेखक और तत्कालीन पुलिस प्रमुख चंद्रकुवेर खापुङ को आपराधिक कृत्य के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर अनुसंधान चलाने की सिफारिश की गई थी। इन नेताओं पर मुलुकी फौजदारी संहिता की दफा 181 और 182 के तहत लापरवाही और गंभीर उपेक्षा (Grievous Negligence) के कारण जान लेने का आरोप लगाया गया है। सूत्रों के मुताबिक,इस आंदोलन के दमनात्मक करवाई 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।यद्यपि यह रिपोर्ट आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई थी, लेकिन इसके अंश मीडिया में पहले ही लीक हो चुके थे।
प्रतिशोध बनाम न्याय: छिड़ी जुबानी जंग गिरफ्तारी के तुरंत बाद नेपाल का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। पूर्व प्रधानमंत्री ओली ने इस कार्रवाई को विशुद्ध रूप से ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया है। अपने वकीलों, रमेश बडाल और टीकाराम भट्टराई से परामर्श के दौरान ओली ने कहा कि वे इस अन्याय के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। वहीं, गृहमंत्री सुधन गुरुङ ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट संदेश देते हुए लिखा कि “कानून से ऊपर कोई नहीं है, यह प्रतिशोध नहीं बल्कि न्याय की शुरुआत है।” उन्होंने इसे जनता से किया गया अपना वादा (Promise) बताया है।
आगामी कदम और सुरक्षा व्यवस्था गिरफ्तारी के बाद केपी शर्मा ओली को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए टिचिंग अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। नियमानुसार, उन्हें 24घंटे के भीतर काठमांडू जिला अदालत में पेश किया जाएगा। इस बीच, मुख्य विपक्षी दल नेकपा (एमाले) ने इस गिरफ्तारी के विरोध में आपातकालीन सचिवालय बैठक बुलाई है और देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। एमाले नेता महेश बस्नेत ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रमुख सरकारी प्रतिष्ठानों पर अतिरिक्त बल तैनात किया गया है
