
काठमांडू/वीरगंज।(Vor desk)। नेपाल में नवोदित सरकार के ताबड़तोड़ फैसलों ने सियासी माहौल को बेहद गरमा दिया है। पूर्व शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी के बाद राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं और देश एक बार फिर बड़े राजनीतिक टकराव के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है।
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब सरकार के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हिरासत में लिया गया। इसके कुछ ही घंटों के भीतर पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इन कार्रवाइयों को विपक्ष ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताते हुए देशव्यापी आंदोलन का आह्वान कर दिया, जिसके बाद सड़कों पर हजारों कार्यकर्ता उतर आए।राजधानी काठमांडू सहित पोखरा,चितवन, हेतौडा,वीरगंज सहित देश के विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए।प्रदर्शकारी शनिवार की शाम सिंह दरबार यानी संसद भवन में भी घुसने की कोशिश की,जिसको पुलिस ने विफल कर दिया।
हालांकि पूर्व पीएम ओली और पूर्व गृह मंत्री के गिरफ्तारियों को हाल ही में हुए ‘जेन जेड आंदोलन’ के दौरान हुई हिंसक घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।और गिरफ्तारी होनी है। जेनजी आंदोलन के दौरान कथित रूप से हुई गोलीबारी और लाठीचार्ज में कई आंदोलनकारियों की मौत और घायल होने की घटनाएं सामने आई थीं। नवगठित सरकार का मानना है कि उस समय की कार्रवाई के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक जिम्मेदार थे, और इसी आधार पर उनके खिलाफ यह कठोर कदम उठाया गया है।
गिरफ्तारी के बाद पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने अपने समर्थकों के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता इस सच्चाई को समझ रही है और इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा। वहीं पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक ने भी अपनी गिरफ्तारी को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
वर्तमान प्रधानमंत्री बालेंन साह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार कानून के तहत काम कर रही है और किसी भी प्रकार की अनियमितता या अत्याचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “यह कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए की गई है।” प्रधानमंत्री ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून का सम्मान करने की अपील भी की।
वहीं गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन के नाम पर हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, साथ ही पुलिस को संयम बरतने के निर्देश भी दिए गए हैं।परसा जिला के सांसद हरि पंत ने भी कहा कि यह प्रतिशोध की राजनीति नहीं,बल्कि जेनजी आंदोलन के शहीदो को न्याय दिलाने का कदम है।
सरकार और विपक्ष के बीच इस टकराव का असर सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। नेपाली कांग्रेस समेत कई दलों के नेता और कार्यकर्ता विरोध में उतर आए हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की खबरें सामने आई हैं, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है।
देर शाम तक प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर हालात को आंशिक रूप से नियंत्रण में करने की कोशिश की है, लेकिन संवेदनशील इलाकों में तनाव बरकरार है और छिटपुट विरोध जारी है। पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है।
फिलहाल नेपाल की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। एक ओर सरकार इस कार्रवाई को न्याय और जवाबदेही का कदम बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार देकर आंदोलन को और तेज करने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह टकराव संवाद में बदलता है या देश को एक और बड़े जनआंदोलन की ओर ले जाता है।(रिपोर्ट:एम .राम)
