Friday, November 6

मोतिहारी में गिरोह बेनकाब, आदापुर में बरामदगी; रक्सौल के मंदिरों को अब भी न्याय का इंतजार!

अंतरराज्यीय मंदिर चोर गिरोह बेनकाब, रक्सौल के मंदिरों की चोरी अब भी अनसुलझी

आदापुर की कड़िया नदी से चोरी के आभूषण और छत्री के हिस्से बरामद, सोनार की संलिप्तता भी आई सामने; आबकारी हनुमान और एंबेसी हनुमान मंदिर में चोरी के महीनों बाद भी पुलिस के हाथ खाली

रक्सौल।(Vor desk)

मंदिरों से मुकुट, छत्र और कीमती आभूषण चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का मोतिहारी पुलिस ने पर्दाफाश किया है। चार कथित चोरों की गिरफ्तारी और आदापुर क्षेत्र की कड़िया नदी से चोरी के सामान की बरामदगी ने मंदिरों में चोरी की घटनाओं के पीछे सक्रिय नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह के तार बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश और नेपाल तक जुड़े हैं। लेकिन इस खुलासे के बीच रक्सौल के दो प्रमुख हनुमान मंदिरों में हुई चोरी का मामला एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आबकारी हनुमान मंदिर और एंबेसी (राजदंडी) हनुमान मंदिर से मुकुट एवं अन्य आभूषण चोरी हुए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इन मामलों का उद्भेदन नहीं हो सका है। रक्सौल पुलिस की जांच कहां तक पहुंची, इसका भी कोई स्पष्ट खुलासा सामने नहीं आया है।

आदापुर की कड़िया नदी तक पहुंची पुलिस, सोनार की भूमिका भी संदिग्ध

मोतिहारी में सदर-01 एसडीपीओ दिलीप कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस कर मंदिर चोरी गिरोह के खुलासे की जानकारी दी। एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए चार आरोपितों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपितों में दिनेश कुमार, निवासी श्यामपुर बाजार, आदापुर; बब्लू कुमार, निवासी छोटका बंगरी, घोड़ासहन; श्याम सुंदर कुमार, निवासी इनरवा फुलवार, लखौरा और सुभाष महतो, निवासी गम्हरिया खुर्द, आदापुर शामिल हैं। चोरी का सामान खरीदने के मामले में एक सोनार भी आरोपित बताया गया है।

पुलिस ने करीब 300 ग्राम चांदी के जेवर और चोरी का छत्र बरामद किया है। वहीं, आदापुर क्षेत्र की कड़िया नदी में छिपाकर रखे गए मंदिर के छत्री के कई हिस्से भी बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपित मंदिरों से अष्टधातु और चांदी के मुकुट व छत्र चोरी करने के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए उन्हें गलवा देते थे। इसके बाद धातु से नए आभूषण तैयार कराए जाते थे।इस मामली सोनार संलिप्तता सामने आने पर उसके द्वारा चोरी के सामान की खपत और नेटवर्क में उसकी भूमिका की जांच का रास्ता खुला है। हालांकि,पुलिस इस मामले पर पूरी तरह खुल कर बोलने से बचती दिख रही है।

आनंद धाम और साईं मंदिर की चोरी से खुला नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, गिरोह ने नगर थाना क्षेत्र के बेलिसराय स्थित आनंद धाम मंदिर और मिस्कॉट स्थित साईं मंदिर में चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया था। आनंद धाम मंदिर से 8 जून को मुकुट और छत्र चोरी हुए थे। इस मामले में नगर थाना कांड संख्या 522/26 दर्ज है। वहीं, 21 अक्टूबर को साईं मंदिर से मुकुट और छत्र चोरी होने पर कांड संख्या 1023/26 दर्ज किया गया था। पूछताछ में आरोपितों ने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर और बलिया तथा नेपाल के विभिन्न मंदिरों में भी चोरी की घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकार की है।

रक्सौल के दो मंदिरों की चोरी पर पुलिस की चुप्पी क्यों?

इस पूरे घटनाक्रम में रक्सौल के आबकारी हनुमान मंदिर और एंबेसी (राजदंडी) हनुमान मंदिर की चोरी का मामला सबसे अहम सवाल बनकर उभर रहा है। दोनों मंदिरों से मुकुट और अन्य कीमती आभूषण चोरी हुए थे। घटनाओं को कई महीने गुजर चुके हैं, लेकिन न तो चोरी गए सामान की बरामदगी की सूचना सामने आई और न ही आरोपितों की गिरफ्तारी या गिरोह के उद्भेदन का कोई स्पष्ट नतीजा सार्वजनिक हुआ है।

मोतिहारी पुलिस ने जब मंदिरों को निशाना बनाने वाले गिरोह के अंतरराज्यीय और नेपाल तक फैले नेटवर्क का खुलासा किया है, तब यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या रक्सौल के दोनों मंदिरों में हुई चोरी की घटनाओं का भी इसी गिरोह या इससे जुड़े किसी नेटवर्क से संबंध है? यदि ऐसा है तो अब तक रक्सौल पुलिस की जांच इस दिशा में कितनी आगे बढ़ी है? क्या चोरी के आभूषणों को गलाकर बेचने वाले नेटवर्क की कड़ियां रक्सौल की घटनाओं से भी जुड़ती हैं?

सवाल बरकरार, रक्सौल पुलिस कब देगी जवाब?

आदापुर की कड़िया नदी से चोरी के सामान की बरामदगी और सोनार की गिरफ्तारी ने यह संकेत दिया है कि मंदिरों से चोरी के बाद सामान को छिपाने, गलाने और नए आभूषणों के रूप में खपाने का संगठित तंत्र सक्रिय हो सकता है। ऐसे में रक्सौल की दोनों घटनाओं की जांच को इस नेटवर्क से जोड़कर देखना जरूरी है। हालांकि, अभी यह प्रमाणित नहीं है कि आबकारी हनुमान और एंबेसी हनुमान मंदिर की चोरी में गिरफ्तार आरोपितों की कोई भूमिका रही है।

मोतिहारी पुलिस की कार्रवाई ने जिले में मंदिर सुरक्षा और चोरी के मामलों की जांच को लेकर नई उम्मीद जगाई है। लेकिन रक्सौल के श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का सवाल अपनी जगह कायम है। जब जिले में अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा हो सकता है, चोरी का सामान बरामद हो सकता है और उसे खरीदने वाले सोनार तक पुलिस पहुंच सकती है, तो रक्सौल के मंदिरों में हुई चोरी का उद्भेदन अब तक क्यों नहीं हो सका? आखिर रक्सौल पुलिस इन मामलों में कब तक खाली हाथ रहेगी?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected , Contact VorDesk for content and images!!