Saturday, October 17

वीरगंज के शक्तिपीठ गहवामाई मंदिर में फूलो की वर्षा के बीच आयोजित हुई फूलपाती, सेना ने दी सलामी, उमड़ा आस्था का जनसैलाब!

वीरगंज।(Vor desk)। बडादसैँ (दशहरा) के पावन अवसर पर नेपाल के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में शुमार वीरगंज स्थित गहवामाई मंदिर में महासप्तमी पर फूलपाती का पर्व अत्यंत भव्यता और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक और धार्मिक अवसर पर सीमावर्ती नेपाल-बिहार के हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब माता के दर्शन के लिए उमड़ पड़ा।
माता की जयजयकार और पुष्प वर्षा के बीच अहले सुबह निर्धारित शुभ मुहूर्त (नेपाली समयानुसार प्रातः 7:37 बजे) पर माता का पवित्र डोला गाजे-बाजे के साथ निकाला गया। नेपाल सेना के चंडी प्रसाद गण बैरक से निकली यह दिव्य शोभायात्रा मालपोत कार्यालय पहुंची, जहां से निशान भगवती मंदिर से डोला लेकर गहवामाई मंदिर परिसर ले जाया गया। डोला के मंदिर परिसर में पहुंचते ही नेपाल सेना के अधिकारियों व जवानों ने पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ सलामी दी। इसके बाद नौ देवियों के प्रतीक स्वरूप नौ प्रकार की वनस्पतियों (केला, धान, हल्दी, मान वृक्ष, बेल, अशोक, जयंती आदि नवपत्र) की वैदिक विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना की गई।

माई का खोइंछा भरने देर रात तक डटे रहे श्रद्धालु

विशेष पूजा संपन्न होने के पश्चात आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन-पूजन का द्वार खोल दिया गया। बड़ी संख्या में महिला व्रतियों और श्रद्धालुओं ने माता गहवामाई का खोइंछा भरा और मन्नतें मांगी। मंदिर परिसर समेत पूरे वीरगंज शहर में अलौकिक उत्सवी माहौल देखने को मिला। भक्तजनों की सहूलियत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वीरगंज पुलिस-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नज़र आया।

गहवामाई मंदिर समिति की अगुवाई में आयोजित इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान में वीरगंज के मेयर राजेश मान सिंह, स्थानीय जन प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समाजसेवी मौजूद रहे।

दुल्हन की तरह सजा वीरगंज, लगा भव्य मेला

फूलपाती के अवसर पर गहवामाई मंदिर क्षेत्र, घंटाघर, गीता मंदिर और आदर्शनगर इलाकों को आकर्षक लाइटों व फूलों से दुल्हन की तरह सजाया गया है। इन प्रमुख स्थलों पर भव्य मेले का आयोजन हुआ है, जहां देर रात तक रौनक बनी रही।

अष्टमी पर होगी पारंपरिक बलि पूजा, भारत से भी पहुंचेंगे भक्त

मंदिर के मुख्य पुजारी राधेश्याम प्याकुरेल ने जानकारी देते हुए बताया कि महाअष्टमी के दिन (18 अक्टूबर, रविवार) सुबह 8:30 बजे से मंदिर में पारंपरिक बलिदान (बलि पूजा) का आयोजन किया जाएगा। इसमें मन्नत पूरी होने पर भक्तजन बकरा, खस्सी, मुर्गा और कबूतर आदि की बलि चढ़ाते हैं। इस विशेष पूजा में शामिल होने के लिए भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु वीरगंज पहुंचते हैं, जिसके लिए मंदिर समिति की ओर से सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected , Contact VorDesk for content and images!!