
श्रम अधीक्षक के सख्त रुख के बाद हड़कंप, सीबीएस फैसिलिट मैनेजमेंट को एफआईआर की चेतावनी; एक्टिव हेड क्लर्क पंकज कुमार सिंह पर लगे गंभीर आरोप
रक्सौल (vor desk)। रक्सौल नगर परिषद के 81 सफाईकर्मियों के करीब 10 लाख रुपये के बकाया वेतन और मजदूरी गबन का मामला अब तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में श्रम न्यायालय की एंट्री, जांच के बढ़ते दायरे और सख्त आदेशों के बाद दोषी अधिकारियों व एजेंसी पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। शनिवार को मोतिहारी स्थित श्रम अधीक्षक के न्यायालय में हुई अहम सुनवाई के बाद श्रम अधीक्षक सत्य प्रकाश ने आउटसोर्सिंग एजेंसी ‘सीबीएस फैसिलिट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ को 48 घंटे के भीतर सभी 81 सफाईकर्मियों का बकाया वेतन सीधे उनके बैंक खातों में भेजने का कड़ा निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदेश का अनुपालन न होने पर एजेंसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
सुनवाई के दौरान नगर परिषद की ओर से स्वच्छता प्रभारी कन्हैया कुमार तथा आउटसोर्सिंग एजेंसी के निदेशक कनिष्क कुमार सिंह उपस्थित हुए, जबकि वादी पक्ष की ओर से रोहन मलिक और राजू मलिक ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सफाईकर्मियों के अधिकारों की इस लड़ाई में बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के महासचिव चंद्रशेखर कुमार और सामाजिक कार्यकर्ता रमेश कुमार सिंह ने मजबूती से आवाज उठाई है।
बात आगे बढ़ने के साथ ही नगर परिषद के भीतर हड़कंप मच गया है। सफाईकर्मी सोहन मल्लिक और राज मल्लिक ने आरोप लगाया है कि दीपावली व छठ जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों में दिन-रात काम करने के बावजूद नवंबर 2024 का वेतन दबा लिया गया। कर्मचारियों का सीधा आरोप है कि कथित तौर पर एक्टिव हेड क्लर्क पंकज कुमार सिंह ने एजेंसी से लगभग 10 लाख रुपये की मजदूरी राशि तो ले ली, लेकिन सफाईकर्मियों को इसका भुगतान नहीं किया। इसके अलावा नियमों को दरकिनार कर कई पुराने दैनिक मजदूरों को हटाकर नई आउटसोर्सिंग एजेंसी में शिफ्ट करने का गंभीर मामला भी सामने आया है।
श्रम न्यायालय के निर्देशानुसार सोमवार को सभी आवश्यक दस्तावेज जमा होने के बाद 48 घंटे के भीतर भुगतान की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। श्रम अधीक्षक के इस कड़े रुख से जहां महीनों से प्रताड़ित सफाईकर्मियों में न्याय और राहत की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर मजदूरी गबन और अनियमितता के इस बड़े मामले में दोषी कर्मचारियों व संबंधित एजेंसी पर सीधी विभागीय व कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
