Wednesday, September 2

सात दिन तक बेटे की तलाश, फिर कुश के पुतले को दी मुखाग्नि

नेपाल की बाढ़ में लापता रक्सौल के राहुल का नहीं मिला शव, पिता ने नम आंखों से किया प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार

रक्सौल। (Vor Desk)

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने रक्सौल के एक परिवार से उसका बेटा छीन लिया। सात दिनों तक परिजन और रेस्क्यू टीम राहुल कुमार सिंह की तलाश करते रहे, लेकिन न जिंदगी की कोई खबर मिली और न शव बरामद हो सका। आखिरकार उम्मीद और इंतजार के बीच परिवार को ऐसा फैसला लेना पड़ा, जिसकी कल्पना किसी पिता ने नहीं की होगी। राहुल के पिता धर्म सिंह ने मंगलवार को कुश से बनाए गए प्रतीकात्मक शरीर को मुखाग्नि देकर बेटे का अंतिम संस्कार किया।

रक्सौल प्रखंड की पंटोका पंचायत के भरतम्ही वार्ड संख्या-3 निवासी धर्म सिंह का पुत्र राहुल कुमार सिंह नेपाल के त्रिशूली में एंडीज कंपनी के अधीन संचालित 216 मेगावाट की परियोजना में सुरंग के भीतर काम करता था।

सुरंग में अचानक घुसा पानी, मलबे में दब गया राहुल

26 अगस्त 2026 को राहुल सुरंग के अंदर अपने काम में जुटा था। इसी दौरान अचानक सुरंग में पानी का तेज बहाव प्रवेश कर गया। पानी के साथ भारी मलबा भी अंदर पहुंचा और राहुल उसी मलबे में दब गया। घटना की सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन लगातार प्रयासों के बावजूद सात दिन बाद भी राहुल का कोई सुराग नहीं मिल सका।

राहुल के चाचा विशम्बर सिंह ने घटना का आंखों देखा हाल परिजनों को बताया। हादसे के बाद से पूरा परिवार हर गुजरते घंटे के साथ राहुल के लौटने की उम्मीद लगाए रहा। मगर दिन बीतते गए और उम्मीद धीरे-धीरे निराशा में बदलती गई।

दो साल पहले हुई थी शादी, संतान का सुख भी नहीं मिला

राहुल की शादी करीब दो वर्ष पहले हुई थी। अभी उसके घर में संतान भी नहीं थी। पति के अचानक लापता होने के बाद उसकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस पति के लौटने की वह राह देख रही थी, उसकी कोई खबर तक नहीं मिल सकी।

परिजनों के अनुसार, पत्नी बार-बार यही कहकर विलाप कर रही है—
“नेपाल के पानी हमरा राजा के खा गईल…”

उसके ये शब्द परिवार के उस दर्द को बयां कर रहे हैं, जिसे शब्दों में समेटना मुश्किल है।

शव नहीं मिला तो कुश से बनाया प्रतीकात्मक शरीर

हिंदू परंपरा में ऐसी स्थिति में, जब लंबे समय तक शव नहीं मिल पाता, कुश से मृतक का प्रतीकात्मक शरीर बनाकर अंतिम संस्कार करने की परंपरा है। सात दिनों तक राहुल का शव नहीं मिलने के बाद परिवार ने भारी मन से इसी परंपरा का सहारा लिया।

पिता धर्म सिंह ने बेटे का चेहरा आखिरी बार देखे बिना ही कुश से बने प्रतीकात्मक शरीर को मुखाग्नि दी।

यह दृश्य परिवार के लिए असहनीय था। जिस पिता को कभी अपने बेटे की अर्थी को कंधा देना था, उसे अब बेटे के वास्तविक शरीर के बजाय उसके प्रतीकात्मक रूप को अंतिम विदाई देनी पड़ी।

एक हादसा, तीन रिश्तों का उजड़ना

राहुल के लापता होने से सिर्फ एक जिंदगी खत्म होने की आशंका नहीं है, बल्कि उसके पीछे पूरा परिवार बिखर गया है। पिता ने अपना बेटा खोया, पत्नी ने अपना जीवनसाथी और परिवार ने अपना सहारा।

नेपाल की बाढ़ और बारिश ने राहुल के परिवार को ऐसी पीड़ा दी है, जिसका कोई प्रत्यक्ष अंतिम दृश्य भी उनके हिस्से नहीं आया। न बेटे का शव मिला, न अंतिम बार उसका चेहरा देखने का मौका।

पूर्वी चंपारण के 15 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना

नेपाल में रोजी-रोटी के लिए बड़ी संख्या में बिहार के विभिन्न जिलों के लोग काम करते हैं। नेपाल में आई बाढ़ और हादसों के बाद कई परिवारों की चिंता बढ़ गई है।

पूर्वी चंपारण जिले में अब तक 15 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना उनके परिजनों ने दी है। इसके अलावा कई अन्य परिवार भी अपने लोगों की तलाश में नेपाल में भटक रहे हैं।

राहुल की कहानी उन तमाम परिवारों के दर्द की तस्वीर है, जो सीमा पार रोजी-रोटी की तलाश में गए अपनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं—और हर गुजरते दिन के साथ उनकी उम्मीद और डर, दोनों बढ़ते जा रहे हैं।(रिपोर्ट :खुशबू एम.)

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