
मोतिहारी/रक्सौल।(Vor desk)। भारत-नेपाल सीमा से सटे रक्सौल अनुमंडल सहित पूर्वी चंपारण जिले की पुलिस व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) द्वारा जारी संकल्प के तहत पूर्वी चंपारण सहित राज्य के पांच संवेदनशील जिलों में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) का पद सृजित किया गया है। इसके साथ ही पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक के पदनाम को बदलकर वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कर दिया गया है।
गृह विभाग के उप सचिव किरण माला पंवरिया द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जिले में एक से अधिक पुलिस अधीक्षक पद सृजित होने के बाद उनके अधिकार क्षेत्र एवं पदीय दायित्वों का स्पष्ट निर्धारण किया गया है। नई व्यवस्था के तहत पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), मोतिहारी को तीन अनुमंडलों के कुल 17 थानों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
रक्सौल अनुमंडल के छह थाने अब ग्रामीण एसपी के अधीन
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित संवेदनशील रक्सौल अनुमंडल के अंतर्गत आने वाले छह थानों को ग्रामीण एसपी के अधिकार क्षेत्र में रखा गया है। इनमें शामिल हैं—
छौड़ादानो
आदापुर
दरपा
महुआवा
हरपुर
नकरदेई
सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करी, अंतरराष्ट्रीय अपराध, अवैध आवाजाही और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को देखते हुए इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इन दो अनुमंडलों के थाने भी ग्रामीण एसपी के अधीन
ग्रामीण एसपी के कार्यक्षेत्र में रक्सौल के अलावा सिकरहना और पकड़ीदयाल अनुमंडल भी शामिल किए गए हैं।
सिकरहना अनुमंडल के थाने: पचपकड़ी, कुण्डवा चैनपुर, घोड़ासहन, जितना और झरौखर।
पकड़ीदयाल अनुमंडल के थाने: पकड़ीदयाल, मधुबन, राजेपुर, पताही, फेनहारा और गढ़हिया।
अरेराज और चकिया अनुमंडल की जांच व्यवस्था में नहीं होगा बदलाव
गृह विभाग के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पुलिस अनुमंडल अरेराज और पुलिस अनुमंडल चकिया के अंतर्गत दर्ज कांडों का अनुसंधान पूर्व की भांति वरीय पुलिस अधीक्षक, पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के नियंत्रण में ही रहेगा।
प्रशासनिक भ्रम खत्म करने की कवायद
सरकार ने आदेश में कहा है कि एक ही जिले में एक से अधिक पुलिस अधीक्षक पद होने से अधिकार क्षेत्र को लेकर भ्रम या टकराव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका थी। इसी को देखते हुए सभी पदाधिकारियों के कार्यक्षेत्र और दायित्वों का स्पष्ट निर्धारण किया गया है।
सीमावर्ती पुलिसिंग को मिलेगी मजबूती
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से रक्सौल समेत सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिसिंग और अधिक प्रभावी होगी। अपराध नियंत्रण, तस्करी पर निगरानी, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और त्वरित कार्रवाई की क्षमता में सुधार होगा। साथ ही प्रशासनिक जवाबदेही और समन्वय भी मजबूत होने की उम्मीद है।
पूर्वी चंपारण को संवेदनशील जिला मानते हुए लागू की गई इस नई व्यवस्था को जिले, विशेषकर भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
