Thursday, July 2

नो-मेंस लैंड, आस्था और अंतरराष्ट्रीय नियमों के बीच फंसा भकुआ ब्रह्म बाबा स्थल का मामला, सहमति से समाधान की कोशिश तेज

रक्सौल।(Vor desk)। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल के ऐतिहासिक एवं आस्था के केंद्र भकुआ ब्रह्म बाबा स्थान से जुड़े नो-मेंस लैंड अतिक्रमण मामले को लेकर गुरुवार को प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। अंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा मानकों, केंद्र सरकार के निर्देशों और स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मामले का समाधान आपसी सहमति और विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत ही निकाला जाएगा।

रक्सौल के तुमड़िया टोला स्थित भकुआ ब्रह्म बाबा स्थान परिसर में आयोजित बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) मनीष कुमार, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) मनीष आनंद, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी डा मनीष कुमार,हरैया थानाध्यक्ष किशन कुमार,सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के अधिकारी तथा क्षेत्र के सामाजिक प्रतिनिधि एवं स्थानीय लोग शामिल हुए।

बैठक के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि भकुआ ब्रह्म बाबा स्थान परिसर में स्थित देवी मंदिर का एक हिस्सा भारत-नेपाल सीमा के बीच स्थित नो-मेंस लैंड क्षेत्र में आता है। अंतरराष्ट्रीय सीमा प्रबंधन के नियमों, सुरक्षा मानकों तथा केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार नो-मेंस लैंड क्षेत्र को अतिक्रमणमुक्त रखना आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने मंदिर को उसी परिसर में किसी उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा, ताकि सीमा सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करते हुए धार्मिक आस्था का भी सम्मान किया जा सके।

हालांकि, स्थानीय लोगों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भकुआ ब्रह्म बाबा स्थान की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता का हवाला देते हुए कहा कि यह स्थल दशकों से रक्सौल और आसपास के क्षेत्रों के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि इस स्थान से हजारों श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी हुई हैं, इसलिए किसी भी निर्णय से पहले व्यापक सहमति और संवेदनशीलता आवश्यक है।

बैठक के दौरान कई स्थानीय लोगों ने मंदिर को यथास्थान बनाए रखने की मांग की, जबकि कुछ सामाजिक प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि यदि अंतरराष्ट्रीय सीमा नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत स्थानांतरण अनिवार्य हो, तो सभी पक्षों की सहमति से उसी परिसर में मंदिर का पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि धार्मिक परंपरा और श्रद्धालुओं की आस्था दोनों सुरक्षित रह सकें।

लंबे विचार-विमर्श के बावजूद बैठक में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोगों की भावनाओं की अनदेखी करते हुए कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और सभी संबंधित पक्षों के साथ संवाद जारी रखा जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े नियमों और स्थानीय आस्था के बीच संतुलित एवं सर्वसम्मत समाधान निकालने के लिए आगे भी बैठकें आयोजित की जाएंगी।

भकुआ ब्रह्म बाबा स्थान का मामला अब केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय सीमा प्रबंधन, सुरक्षा मानकों और स्थानीय धार्मिक आस्था के बीच सामंजस्य स्थापित करने की एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है। ऐसे में अब लोगों की नजर प्रशासन और स्थानीय समाज के बीच होने वाली अगली बैठक और संभावित सर्वसम्मत निर्णय पर टिकी हुई है।

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