Sunday, June 21

पूर्वी चंपारण से विदाई के क्षणों में डीएम सौरभ जोरवाल ने बच्चों को कराया गांधी विरासत का परिचय, गांधी संग्रहालय का किया भ्रमण

मोतिहारी।(Vor desk)। पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने जिले से विदा लेने से पहले एक ऐसा संदेश दिया, जिसकी चर्चा प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच हो रही है। अपने कार्यकाल के अंतिम दिन उन्होंने औपचारिकताओं और तामझाम से दूर रहकर अपने बच्चों के साथ ऐतिहासिक गांधी संग्रहालय का भ्रमण किया और उन्हें चंपारण की गौरवशाली विरासत से परिचित कराया।

सादगीपूर्ण ढंग से पहुंचे जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने अपने बच्चों को उस ऐतिहासिक धरा की कहानी बताई, जहां वर्ष 1917 में महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह के माध्यम से देश के स्वतंत्रता आंदोलन की नई दिशा तय की थी। उन्होंने बच्चों को संग्रहालय में संरक्षित दस्तावेजों, तस्वीरों और गांधी साहित्य से अवगत कराया तथा बताया कि किस प्रकार नील की खेती से पीड़ित किसानों की समस्याओं को सुनने के लिए महात्मा गांधी चंपारण आए थे और यहीं से सत्याग्रह तथा अहिंसा का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचा।

गांधी संग्रहालय में मौजूद ऐतिहासिक धरोहरों को देखते हुए जिलाधिकारी ने अपने बच्चों से कहा कि चंपारण केवल एक जिला नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण कर्मभूमि है। उन्होंने सत्य, अहिंसा और मानवीय मूल्यों के महत्व पर भी चर्चा की।

संग्रहालय में संरक्षित तस्वीरों, दस्तावेजों और गांधी साहित्य को दिखाते हुए उन्होंने बच्चों से कहा, “बेटा, याद रखना कि जीवन में सच और अहिंसा से बड़ी कोई ताकत नहीं होती। महात्मा गांधी ने इसी चंपारण की धरती से दुनिया को यह संदेश दिया था कि बिना हिंसा के भी बड़े से बड़ा परिवर्तन संभव है।”
उन्होंने बच्चों को यह भी समझाया कि पद और प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण अच्छे संस्कार, ईमानदारी और समाज के प्रति संवेदनशीलता है। उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों, इतिहास और देश के महान व्यक्तित्वों को जानना हर पीढ़ी की जिम्मेदारी है।

पूर्वी चंपारण में अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करने वाले सौरभ जोरवाल का यह सादगीपूर्ण और पारिवारिक क्षण लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच अपने बच्चों को इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का उनका यह प्रयास एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि वर्ष 1917 में महात्मा गांधी ने चंपारण की धरती से सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की थी, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा प्रदान की थी। आज भी मोतिहारी स्थित गांधी संग्रहालय उस ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

कहा जाता है कि पद और जिम्मेदारियां समय के साथ बदलती रहती हैं, लेकिन समाज और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, इतिहास और मूल्यों से जोड़ने वाले प्रयास लंबे समय तक याद किए जाते हैं।

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