Sunday, June 21

रक्सौल के लाल राहुल कुमार ने बीपीएससी (BPSC 70वीं) में गाड़ा सफलता का परचम, बने राजस्व अधिकारी

बढ़ई और किसान के बेटे ने खुद के दम पर तय किया यूपीएससी मुख्य परीक्षा से बीपीएससी तक का स्वर्णिम सफर

रक्सौल (पूर्वी चंपारण)।(Vor desk)।मेधा, समर्पण और दृढ़ संकल्प अगर अटूट हो, तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। सीमावर्ती शहर रक्सौल के एक साधारण परिवार के होनहार युवक राहुल कुमार ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। राहुल कुमार का चयन प्रतिष्ठित (राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) के पद पर हुआ है। उनकी इस ऐतिहासिक कामयाबी से रक्सौल सहित पूरे चंपारण में जश्न और हर्ष का माहौल है।

बढ़ई व किसान के बेटे ने पूरा किया सपना

राहुल कुमार की यह सफलता इसलिए बेहद प्रेरणादायक है क्योंकि वे किसी बड़े औद्योगिक या रसूखदार परिवार से नहीं आते। उनके पिता मनोज ठाकुर पेशे से एक बढ़ई (कारपेंटर) और किसान हैं, जिन्होंने हाड़-तोड़ मेहनत कर अपने बच्चों की उच्च शिक्षा में कभी कमी नहीं आने दी। उनकी माता गीता देवी एक कुशल गृहणी हैं। राहुल ने अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा रक्सौल के ही हजारीमल हाई स्कूल से पूरी की, जहां उन्होंने वर्ष 2015 में मैट्रिक परीक्षा (69.2%) उत्तीर्ण की थी। इसके बाद उन्होंने गुलाब मेमोरियल कॉलेज, बेतिया से विज्ञान संकाय में 12वीं (77.4%) की पढ़ाई पूरी की।

यूपीएससी (UPSC) की मजबूत नींव ने राह को बनाया आसान

उच्च शिक्षा के लिए राहुल ने देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), करनाल, हरियाणा में दाखिला लिया और 7.8 CGPA के साथ बी.टेक (डेयरी टेक्नोलॉजी) की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक झारखंड स्टेट को-ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन लिमिटेड (रांची) में बतौर ट्रेनी एग्जीक्यूटिव काम भी किया। लेकिन देश और राज्य की शीर्ष प्रशासनिक सेवा में जाने का उनका संकल्प उन्हें वापस किताबों के बीच ले आया।
राहुल कुमार ने वर्ष 2025 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की मुख्य (Mains) परीक्षा लिखी थी। यूपीएससी जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा की गंभीर तैयारी और उसकी मजबूत वैचारिक नींव के कारण उन्हें बीपीएससी की परीक्षा क्रैक करना काफी आसान हो गया। हालांकि बीपीएससी के अपने सफर में उन्हें पहले प्रयास (68वीं प्रारंभिक) और दूसरे प्रयास (69वीं मुख्य परीक्षा) में असफलता हाथ लगी थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने तीसरे प्रयास (70वीं) में रोल नंबर 316221 के साथ मेरिट सूची में अपना स्थान पक्का कर लिया।

बिना किसी बड़े कोचिंग के, ‘सेल्फ स्टडी’ से पाई मंजिल

आज के इस दौर में जहां छात्र कोचिंग संस्थानों पर लाखों रुपये खर्च करते हैं, राहुल कुमार ने मुख्य रूप से अपने दोस्तों के साथ ‘सेल्फ स्टडी’ (स्वाध्याय) को अपनी सफलता का मूलमंत्र बनाया। उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान दृष्टि आईएएस, अनएकेडमी, आईएएस वैली, एडुटेरिया, पीडब्लू और बीसीडब्ल्यू जैसे संस्थानों की अध्ययन सामग्रियों तथा यूट्यूब के चुनिंदा लेक्चर्स का संदर्भ के तौर पर लाभ उठाया। राहुल ने अपनी मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन (GS1 और GS2) के पेपर अंग्रेजी माध्यम में लिखे थे, जबकि निबंध (Essay) का पेपर हिंदी माध्यम में दिया। उनका साक्षात्कार ‘हिंग्लिश’ (हिंदी-अंग्रेजी मिश्रित) माध्यम में हुआ था। इसके अलावा राहुल पूर्व में बिहार एसआई मेंस और जीविका में बीपीएम (BPM) के पद पर भी चयनित हो चुके हैं।

समाज के वंचित तबके के लिए करना चाहते हैं काम

अपनी सफलता पर बात करते हुए राहुल भावुक होकर कहते हैं— “मेरी इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय मेरे माता-पिता, भाई रवि रंजन कुमार और बहन रोशनी कुमारी के साथ ही गुरुजनों,मित्रों के अटूट विश्वास को जाता है। भविष्य में मैं समाज के सबसे वंचित और हाशिए पर खड़े लोगों के लिए पूरी ईमानदारी से काम करना चाहता हूँ और माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दूरदर्शी ‘सात-निश्चय 3’ के सपनों को धरातल पर उतारने में अपना योगदान देना चाहता हूँ।

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