
वीरगंज के मेयर राजेशमान सिंह की मुश्किलें बढ़ीं: नागरिकता जालसाजी मामले में अख्तियार ने दायर किया भ्रष्टाचार का मुकदमा
वीरगंज।(Vor desk)। महानगरपालिका के मेयर राजेशमान सिंह के खिलाफ नागरिकता बनवाने के लिए झूठे दस्तावेजों का सहारा लेने का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। अख्तियार दुरुपयोग अनुसंधान आयोग (CIAA) ने इस विवादित प्रकरण में मेयर सिंह सहित कुल सात लोगों को प्रतिवादी बनाते हुए विशेष अदालत में भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज किया है। आयोग के प्रवक्ता सुरेश न्यौपाने के अनुसार, यह मामला किसी अन्य की बेटी को अपनी संतान बताकर नागरिकता दिलाने से जुड़ा है, जिसे एक गंभीर कानूनी और भ्रष्टाचार का अपराध माना गया है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में मेयर राजेशमान सिंह के अलावा मुख्य रूप से सिन्धुपाल्चोक की रिता भट्टराई को नामजद किया गया है, जिन पर मेयर की बेटी बनकर नागरिकता हासिल करने का आरोप है। आयोग द्वारा दर्ज की गई सूची में वीरगंज-3 के तत्कालीन वडा सचिव भिखारी राय और तत्कालीन कार्यवाहक वडाध्यक्ष तुफैल अख्तर ठकुराई का नाम भी शामिल है, जिनकी भूमिका दस्तावेजों को प्रमाणित करने में संदिग्ध पाई गई है। साथ ही, गृह मंत्रालय की छानबीन समिति के तत्कालीन संयोजक और उपसचिव पुष्कर राणा तथा शाखा अधिकारी परशुराम पोखरेल को भी इस भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी बनाया गया है।
अख्तियार ने मेयर सिंह पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2059 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है। आयोग का तर्क है कि मेयर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अनुचित लाभ प्राप्त किया और इसमें संलिप्त रहे, जिसके लिए उन्हें मुख्य दोषी मानकर कठोर सजा दी जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि इस मामले में मेयर सिंह पहले भी कानूनी घेरे में आ चुके हैं। बीते 19 मई को पर्सा जिला अदालत के न्यायाधीश गायत्री प्रसाद रेग्मी की पीठ ने मेयर सिंह को धरौटी (जमानत) पर रिहा करने का आदेश दिया था। उस समय उन पर हस्ताक्षर की जालसाजी के मामले में 4 लाख रुपये और झूठे विवरण के आधार पर नागरिकता बनवाने के मामले में 15 हजार रुपये की जमानत राशि निर्धारित की गई थी।
इस पूरे प्रकरण की जड़ में यह आरोप है कि मेयर ने रिता भट्टराई की पुत्री रुविना श्रेष्ठ को अपनी पुत्री दर्शाते हुए जन्म प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज तैयार करवाए थे, जिसके आधार पर नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी की गई। वहीं दूसरी ओर, मेयर राजेशमान सिंह का पक्ष इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। मेयर का लगातार यह दावा है कि रिता भट्टराई उनकी दूसरी पत्नी हैं और उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार और तथ्यहीन हैं। मेयर ने पूर्व में भी मीडिया के समक्ष कानूनी प्रक्रिया में अपना पूरा विश्वास जताते हुए यह स्पष्ट किया है कि वे अदालत के माध्यम से अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे और सच्चाई सामने आएगी। अब देखना यह होगा कि अख्तियार द्वारा दायर इस भ्रष्टाचार के मुकदमे के बाद विशेष अदालत का रुख क्या रहता है।
