Tuesday, June 2

नारायणहिटी राजदरबार हत्याकांड के 25 वर्ष: अनसुलझे रहस्य और ‘बालेन’ सरकार से जनता की उम्मीदें

वीरगंज।(Vor desk)। नारायणहिटी राजदरबार हत्याकांड को आज 25 वर्ष पूरे हो गए हैं, लेकिन ढाई दशक बीत जाने के बाद भी उस काली रात का रहस्य आज भी रहस्य की परतों में दबा हुआ है। इस बीच वीरगंज में आयोजित एक श्रद्धांजलि सभा में स्वर्गीय राजा वीरेन्द्र शाह के प्रति न केवल सम्मान प्रकट किया गया, बल्कि उस हत्याकांड की निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने लाने की मांग भी जोर-शोर से उठी। राजभक्त देशभक्त केंद्रीय कार्यालय द्वारा वीरगंज महानगरपालिका-7 स्थित हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि इतने वर्षों बाद भी जनता के मन में उस घटना को लेकर गहरे सवाल मौजूद हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजभक्त देशभक्त के केंद्रीय अध्यक्ष दीपेन्द्र प्रसाद रौनियार ने कहा कि इतिहास के पन्नों में दर्ज यह घटना आज भी एक अनसुलझा सवाल बनी हुई है। सभा को संबोधित करने वाले वक्ताओं ने एक स्वर में मांग की कि नारायणहिटी कांड की सच्चाई को अब पूरी तरह सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वक्ताओं का मानना था कि समय बीतने के साथ ही इस मामले से जुड़ी फाइलों को दबाने के बजाय, इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जानी चाहिए ताकि दोषियों को न्याय के दायरे में लाया जा सके।
इस श्रद्धांजलि सभा के दौरान एक नया और महत्वपूर्ण एंगल उभर कर सामने आया, जिसमें जनता की निगाहें अब काठमांडू महानगरपालिका के मेयर बालेन्द्र साह (बालेन) की ओर टिकी हुई हैं। सभा में उपस्थित समर्थकों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में जिस तरह से बालेन साह ने व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई है और जनता के विश्वास को जीता है, उनसे अपेक्षा बढ़ गई है। वहां चर्चा का विषय बना था कि क्या बालेन साह जैसे युवा और साहसी नेतृत्व के हस्तक्षेप या उनके बढ़ते प्रभाव से उस जघन्य हत्याकांड के छिपे हुए पहलुओं पर नई रोशनी पड़ सकती है। जनता को उम्मीद है कि यदि निष्पक्ष जांच का माहौल बनता है, तो बालेन जैसे नेताओं की सक्रियता इसमें निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
कार्यक्रम में पशुपति विक्रम शाह, महेन्द्र प्रसाद शाह, वीरेन्द्र थापा, रामनारायण शाह, जनकलाल शाह, जयनारायण गौरो, अनु राणा, रञ्जन कुमार और रोशनी शाह सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने स्वर्गीय राजा वीरेन्द्र शाह के कार्यकाल को याद करते हुए उन्हें विकास और जनकल्याण का प्रतीक बताया। वक्ताओं ने कहा कि उनके समय में देश में जो शांति और स्थिरता थी, वह आज भी एक बेंचमार्क है।
ढाई दशक का लंबा अंतराल बीत जाने के बाद भी वीरगंज की इस सभा ने यह सिद्ध कर दिया है कि नारायणहिटी कांड की टीस अभी कम नहीं हुई है। अब देखना यह है कि क्या नई पीढ़ी के नेतृत्व और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच इस 25 साल पुराने रहस्य का खुलासा हो पाता है, या यह घटना हमेशा के लिए अनसुलझी पहेली बनकर रह जाएगी।

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