
रक्सौल।(Vor desk)। शहर के ऐतिहासिक महत्व वाले ‘राजकीय प्राथमिक विद्यालय, राष्ट्रीय गांधी’ में शनिवार का दिन नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए खास रहा। ग्रीष्मावकाश (गर्मी की छुट्टियां) शुरू होने से पूर्व, विद्यालय में एक विशेष प्रोत्साहन कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों के बीच उपयोगी उपहारों का वितरण कर उनके उत्साह को दोगुना कर दिया गया।
सेवा और समर्पण: एक नेक पहल
यह कार्यक्रम मौजे चौक निवासी व्यवसायी स्वर्गीय शंकर प्रसाद केशरीवाल की पुण्य स्मृति में आयोजित किया गया। उनकी धर्मपत्नी श्री मति महा पति देवी और सुपुत्र, वरिष्ठ पत्रकार राजेश केशरीवाल के सौजन्य से विद्यालय के सभी बच्चों को थर्मस और बिस्कुट वितरित किए गए। इस दौरान बच्चों में गजब का उत्साह देखने को मिला।
सम्मान और प्रोत्साहन का क्षण
कार्यक्रम के दौरान केवल बच्चों को ही नहीं, बल्कि विद्यालय के शिक्षकों और प्रबंधकों के प्रति भी सम्मान प्रकट किया गया। समाज के प्रति उनके योगदान के लिए प्रधानाध्यापक मुनेश राम,शिक्षिका सरोज कुमारी,श्री मति अनिला देवी(सचिव, विद्यालय शिक्षा समिति) को थर्मस भेंट कर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
शिक्षा ही उज्ज्वल भविष्य की नींव: महापति देवी
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती महापति देवी ने बच्चों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा, “सरकारी विद्यालय जरूरतमंद बच्चों के सपनों को उड़ान देने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।” उन्होंने बच्चों को नियमित स्कूल आने और शिक्षा के महत्व को समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि समाज के सहयोग से ऐसे विद्यालयों को और भी बेहतर बनाया जा सकता है।
विरासत को सहेजने का संकल्प
वरिष्ठ पत्रकार राजेश केशरिवाल ने विद्यालय के ऐतिहासिक गौरव को याद करते हुए कहा कि चंपारण सत्याग्रह की स्मृतियों से जुड़े इस संस्थान का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। उन्होंने कहा, “हमें इस विरासत को सुरक्षित रखना है और इसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक आदर्श शिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करना है।”
समाज की सक्रिय भागीदारी पर जोर
जदयू नेता सन्नी पटेल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय गांधी विद्यालय रक्सौल की ऐतिहासिक पहचान है। बच्चों के भविष्य को संवारने में समाज के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों का साथ होना अनिवार्य है।
कार्यक्रम की झलकियां
इस गरिमामयी अवसर पर समाजसेवी नुरुल्लाह खान, वरिष्ठ पत्रकार दीपक अग्निरथ सहित दर्जनों अभिभावक, स्थानीय नागरिक और गणमान्य समाजसेवी उपस्थित रहे। उपस्थित सभी लोगों ने इस नेक पहल की सराहना की और इसे बच्चों के मनोबल व विद्यालय के प्रति उनके जुड़ाव को बढ़ाने वाला एक सार्थक प्रयास बताया।कहा’ यह ऐतिहासिक महत्व का यह विद्यालय न केवल ज्ञान का केंद्र है, बल्कि रक्सौल की सामाजिक एकजुटता और सेवा भाव का भी प्रतीक बन गया है।‘

इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने की जरूरत है। समुदाय के सहयोग से इसे काफी बेहतर किया जा सकता है हालांकि सरकार भी सरकारी विद्यालयों को शैक्षणिक हब के रूप में विकसित करने के लिए संकल्पित है। साधुवाद इस उतम प्रयास को 🪴💐