
भारतीय रिजर्व बैंक (पटना) के क्षेत्रीय निदेशक सुजीत कुमार अरविंद की अध्यक्षता में जुटे देश के दिग्गज बैंकर
भारत-नेपाल सीमा पर व्यापार को सरल बनाने और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के नियमों पर हुआ गहन मंथन
सीमावर्ती क्षेत्र में नेपाली करेंसी एक्सचेंज और विभिन्न बैंकों की पार्किंग की समस्या पर भी हुई चर्च
रक्सौल ।(Vor desk)।भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल के व्यावसायिक महत्व और नेपाल के साथ द्विपक्षीय व्यापार को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), पटना के विदेशी मुद्रा विभाग द्वारा अधिकृत व्यापारी बैंकों, निर्यातकों एवं आयातकों के लिए ‘फॉरेक्स फॉर यू’ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस उच्च स्तरीय कार्यशाला की अध्यक्षता रिजर्व बैंक (पटना) के क्षेत्रीय निदेशक सुजीत कुमार अरविंद ने की।
कार्यशाला का शुभारंभ आरबीआई के विदेशी मुद्रा विभाग के महाप्रबंधक शिव कुमार यादव के स्वागत संबोधन से हुआ। इस दौरान आयात-निर्यात और अधिकृत व्यापारी बैंकों के कामकाज को सरल बनाने तथा उनकी मौजूदा समस्याओं के व्यावहारिक समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई।अपने संबोधन में क्षेत्रीय निदेशक श्री अरविंद ने भारत-नेपाल सीमा पर स्थित होने के कारण रक्सौल के व्यापारिक महत्व का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को मजबूत करने के लिए आरबीआई ऐसी कार्यशालाएं नियमित आयोजित करता रहेगा।साथ ही उन्होंने आयात-निर्यात संबंधित रिजर्व बैंक के अद्यतन परिपत्रों (सर्कुलर) से भी प्रतिभागियों को अवगत कराया।

1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे नए दिशानिर्देश
कार्यशाला में निर्यात और आयात को और अधिक सुगम बनाने के लिए आगामी 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले क्रांतिकारी बदलावों की जानकारी दी गई। आरबीआई अधिकारियों ने बताया कि अब सॉफ्टवेयर निर्यात घोषणा पत्र (सॉफ्टेक्स) व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। इसके साथ ही अधिकृत व्यापारी बैंकों के अधिकारों में बड़ा इजाफा करते हुए उन्हें सीधे ‘खाता बट्टा खाते में डालने’ (राइट ऑफ) और ‘विभिन्न पक्षों एवं उत्पादों के आपसी समायोजन’ (क्रॉस पार्टी एंड प्रोडक्ट सेटऑफ) की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा, ‘शत-प्रतिशत अग्रिम भुगतान – 1 साल तक प्रविष्टि लंबित रहने पर’ क्या प्रक्रिया होगी, इस पर भी तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया।
भारतीय रुपये के अंतर्राष्ट्रीयकरण और भारत-नेपाल व्यापार पर चर्चा
कार्यक्रम में आगे भारतीय रुपये के अंतर्राष्ट्रीयकरण एवं आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में द्विपक्षीय व्यापार में रुपये के महत्व पर विस्तृत चर्चा की गई। इस कार्यशाला का मुख्य सत्र आयातकों और निर्यातकों के समक्ष आने वाली नियमित चुनौतियों तथा उनके निवारण पर केंद्रित था।
फेमा 1999 के नियमों पर हुआ संवादात्मक सत्र
कार्यशाला के अंत में एक संवादात्मक खुला सत्र (ओपन सेशन) आयोजित किया गया, जिसमें रिजर्व बैंक के अधिकारियों द्वारा फेमा (FEMA) 1999 के अंतर्गत विनियमों और नेपाल के साथ व्यापार आदि से जुड़े प्रतिभागियों के विभिन्न सवालों के उत्तर दिए गए। कार्यक्रम के समापन के पूर्व श्री अरविंद ने एडी (AD) बैंकों से अनुरोध किया कि आज की कार्यशाला में प्राप्त जानकारी को आगे अपने सहकर्मियों तथा साथियों के साथ साझा करें, जिससे उनकी भी जागरूकता बढ़ेगी।
नेपाली करेंसी एक्सचेंज,पार्किंग समस्या पर भी चर्चा
इस दौरान व्यापारियों ने सीमावर्ती शहर रक्सौल में नेपाली करेंसी एक्सचेंज की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए मांग किया कि एसबीआई और एचडीएफसी बैंको में स्थापित मनी एक्सचेंज काउंटर में सुविधा प्रदान की जाए। वहीं,विभिन्न बैंक कार्यालय के आगे बैंकिंग और व्यापारिक गतिविधियों के दौरान वाहनों की ‘पार्किंग’ को लेकर आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को प्रमुखता से उठाया, जिसपर जल्द सकारात्मक निराकरण का आश्वासन दिया।

शीर्ष बैंकरों की रही उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक में बैंकिंग जगत के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। मुख्य रूप से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (अंचल पटना) के महाप्रबंधक राजीव रंजन सिन्हा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के उप महाप्रबंधक प्रफुल्ल कुमार झा, एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव कुमार सिंह तथा रक्सौल शाखा के मुख्य प्रबंधक प्रेम शंकर ठाकुर उपस्थित रहे।
इनके अलावा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अग्रणी जिला प्रबंधक (मोतिहारी) राजेंद्र कुमार पाण्डेय, रक्सौल शाखा प्रबंधक आशीष रंजन, उप शाखा प्रबंधक अनुभव शिवा के साथ-साथ स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक व शाखा प्रबंधक तथा एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और इंडियन बैंक के विभिन्न प्रबंधकों ने हिस्सा लिया।
