
रक्सौल, पूर्वी चंपारण/(vor desk)/30 अप्रैल 2026
रक्सौल नगर परिषद में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में राज्य निर्वाचन आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने तत्कालीन मुख्य पार्षद धुरपति देवी को नगरपालिका का कोई भी पद धारण करने के लिए अयोग्य और निरर्हित घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद मुख्य पार्षद का पद रिक्त हो गया है और उपचुनाव का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव पर प्रारूप क गठित कर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग का 11 पन्नों का आदेश
राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. दीपक प्रसाद ने 28 अप्रैल 2026 को 11 पृष्ठीय आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि धुरपति देवी पर लगे आरोप प्रशासनिक और अर्द्ध-न्यायिक दोनों जांच में सही पाए गए। आयोग ने पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी-सह-निर्वाचन पदाधिकारी को निर्देश दिया कि तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव के खिलाफ तत्काल “प्रपत्र-क” गठित कर विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए और उसकी प्रति आयोग को भेजी जाए। आदेश की एक प्रति नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को भी भेजी गई है।
क्या थे आरोप?
- बैठकें नहीं बुलाई गईं: बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 48(1) के तहत हर महीने बोर्ड की बैठक अनिवार्य है। 25 महीनों में केवल 8 बैठकें हुईं। आयोग ने इसे “संवैधानिक दायित्वों की जानबूझकर उपेक्षा” माना।
- अवैध नियुक्तियां: विभागीय रोक के बावजूद ग्रुप-C और ग्रुप-D के पदों पर नियुक्तियां की गईं। आयोग ने बिना विज्ञापन और प्रक्रिया के धुरपति देवी के नाती की नियुक्ति को गंभीर अनियमितता बताया।
- वित्तीय गड़बड़ी: करोड़ों की सामग्री खरीद में बोर्ड की मंजूरी और बजट प्राक्कलन नहीं लिया गया। सरकारी निधि की निकासी में भी अनियमितता पाई गई।
EO की भूमिका पर सवाल
आयोग ने कहा कि सरकारी धन की निकासी, खरीद और अवैध बहाली में तत्कालीन EO अनुभूति श्रीवास्तव की भूमिका संदिग्ध और मिलीभगतपूर्ण रही। इसलिए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई जरूरी है।
पृष्ठभूमि
यह कार्रवाई उप-मुख्य पार्षद पुष्पा देवी की शिकायत पर शुरू हुई। पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल की जांच रिपोर्ट को आयोग ने फैसले का आधार बनाया।
इससे पहले नगर विकास एवं आवास विभाग ने 5 अगस्त 2025 को धारा 25(5) के तहत धुरपति देवी को पदमुक्त किया था। भ्रष्टाचार और नियमों की अवहेलना को आधार बनाया गया था। धुरपति देवी ने इसके खिलाफ राज्य निर्वाचन आयोग में याचिका दायर की थी। आयोग ने सुनवाई और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद विभागीय कार्रवाई को सही ठहराते हुए उन्हें भविष्य के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया।
आयोग का स्पष्ट आदेश
“बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा-18(1)(l) सह-पठित धारा-18(2) के तहत प्राप्त शक्तियों के अधीन धुरपति देवी को तत्काल प्रभाव से नगरपालिका के अंतर्गत पदधारण करने हेतु अयोग्य एवं निरर्हित घोषित किया जाता है।”
धुरपति देवी का पक्ष
धुरपति देवी ने फैसले को “राजनीतिक साजिश” बताया। उनका कहना है कि आरोप गलत हैं। उन्होंने नगर विकास विभाग और राज्य निर्वाचन आयोग दोनों के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। उन्होंने कहा, “देर है, अंधेर नहीं है, हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। न्याय जरूर मिलेगा।”
क्या कहा शिकायतकर्ता ने
मामले की शिकायतकर्ता रहीं उप मुख्य पार्षद पुष्पा देवी जो अब कार्यवाहक मुख्य पार्षद(कार्यवाहक सभापति) है,ने अपनी प्रतिक्रिया में राज्य निर्वाचन आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सत्य की जीत हुई है।यह जीत रक्सौल की जनता की जीत है।
आगे क्या
मुख्य पार्षद का पद रिक्त होने के बाद रक्सौल नगर परिषद में जल्द उपचुनाव की तिथि घोषित होने और प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।राज्य चुनाव के निर्देश पर पहले से ही तैयारी चल रही है।ताजा फैसले के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
