
रक्सौल।(Vor desk)।18 अप्रैल 2026
भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती आपराधिक गतिविधियों, शराब तस्करी और क्रॉस बॉर्डर नेटवर्क के खतरे के बीच बिहार सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए रक्सौल स्थित एसएसबी मुख्यालय में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर व्यापक रणनीति तय की। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और पुलिस महानिदेशक विनय कुमार की संयुक्त अध्यक्षता में हुई इस बैठक से स्पष्ट संकेत दिया गया कि नई सरकार के गठन और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी राज्य में शराबबंदी नीति सख्ती से जारी रहेगी और सीमा पार से होने वाली अवैध आपूर्ति को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि पूर्वी चंपारण की 114.54 किमी लंबी भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी और संगठित अपराध का दबाव लगातार बना हुआ है। वर्ष 2022 से 2026 के बीच शराब तस्करी के 22,500 मामले दर्ज किए गए, जबकि हथियार तस्करी के 779 मामलों में 1179 गिरफ्तारियाँ हुईं। मादक पदार्थों के 448 मामलों में 663 गिरफ्तारी और जाली नोट के 10मामलों में ₹54.64 लाख की जब्ती यह संकेत देती है कि सीमा क्षेत्र अपराधियों के लिए सक्रिय गलियारा बना हुआ है।
हाल के महीनों में मोतिहारी में जहरीली शराब से हुई मौतों ने राज्य स्तर पर चिंता बढ़ाई है। इसके मद्देनजर बैठक में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि शराबबंदी के बाद अवैध शराब की सप्लाई नेपाल सीमा के जरिए हो रही है, जिसे हर हाल में रोकना होगा। साथ ही यह भी माना गया कि शराब की उपलब्धता कम होने के बाद ‘सूखा नशा’—जैसे गांजा, स्मैक, चरस और नशीली गोलियों—का कारोबार तेजी से बढ़ा है, जिसके तार नेपाल से जुड़े हुए हैं और यह एक बड़े क्राइम नेक्सस का हिस्सा बन चुका है।
सीमा क्षेत्र में अवैध विदेशी घुसपैठ के कुल 41 मामलों में उल्लेखनीय तथ्य यह है कि वर्ष 2025 में अकेले 25 विदेशी नागरिक पकड़े गए। पकड़े गए विदेशियों में बांग्लादेशी, श्रीलंकाई एवं अबू धाबी नागरिक सम्मिलित हैं, जिनके संबंध में संबंधित देशों के दूतावासों को सूचना प्रेषित की जा चुकी है।
रक्सौल अनुमंडल में 1918 अभियुक्तों सेगांजा, चरस, स्मैक, अफीम, नशीली गोलियाँ एवं सुइयाँ जैसे विभिन्न प्रकार के मादक पदार्थों की बरामदगी और मानव तस्करी के 574 मामलों में रेस्क्यू किए गए लोगों के आंकड़े इस नेटवर्क की गहराई को दर्शाते हैं। रोजगार के नाम पर मानव व्यापार करने वाली संदिग्ध कंपनियों की पहचान भी की गई है, जिससे सीमा पार अपराध के नए आयाम सामने आए हैं।
सीमा प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने भौतिक ढांचे पर भी फोकस बढ़ाया है।पूर्वी चम्पारण की 114.54 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कुल 1237 सीमा स्तंभों में से 931 सुरक्षित एवं स्पष्ट स्थिति में हैं।जबकि 73 के क्षतिग्रस्त होने पर उनकी मरम्मत और संयुक्त निगरानी की व्यवस्था की गई है। नो-मैन्स लैंड और 0–15 किमी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की मुहिम तेज करते हुए 121 में से 117 मामलों का निष्पादन किया जा चुका है, जबकि शेष पर कार्रवाई जारी है।सीमा से 15 किलोमीटर की दूरी तक रक्सौल एवं सिकरहाना में कुल 34 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं।नो-मैन्स लैंड में चिन्हित 4 अनधिकृत धार्मिक संरचनाओं को भी हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है, ताकि इस क्षेत्र का दुरुपयोग तस्करी, अवैध गतिविधियों और देह व्यापार जैसे अवैध क्रिया कलाप के लिए न हो सके।
बैठक में स्पष्ट रूप से कहा गया कि नो-मैन्स लैंड को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त और सुव्यवस्थित करना ही सीमा सुरक्षा की कुंजी है। यही क्षेत्र अक्सर शराब, मादक पदार्थों और अवैध गतिविधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन जाता है। इसे खाली कराकर और सीमा स्तंभों को दुरुस्त कर निगरानी मजबूत करने से न केवल अपराध पर अंकुश लगेगा, बल्कि भारत-नेपाल के बीच पारंपरिक सौहार्द भी बना रहेगा।
प्रशासनिक स्तर पर भी सख्ती के संकेत दिए गए हैं। BNSS की धारा-107 के तहत 53 अवैध कारोबारियों के खिलाफ ₹53 करोड़ से अधिक और भू-माफिया के खिलाफ ₹12 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वहीं, कर संग्रह में वृद्धि यह दर्शाती है कि वैध आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ अवैध व्यापार पर शिकंजा कसा जा रहा है।मोतिहारी वाणिज्य कर अंचल में GST संग्रहण वित्तीय वर्ष 2024-25 के ₹307.75 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹370.09 करोड़ हो गया है, जो लगभग 20.26 प्रतिशत की वृद्धि है। रक्सौल वाणिज्य कर अंचल में भी ₹95 करोड़ से बढ़कर ₹109.21 करोड़ की वसूली हुई है, जो 14.96 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अरविंद कुमार चौधरी, एसटीएफ के महानिदेशक कुंदन कृष्णन, एसएसबी के उप महानिरीक्षक (बेतिया) हरि प्रकाश,पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल, पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात, रक्सौल एसडीएम मनीष कुमार, एसडीपीओ मनीष आनंद,एसएसबी 71वी बटालियन कमांडेंट प्रफुल्ल कुमार, एसएसबी 47वी बटालियन कमांडेंट संजय पांडे,जिला भू-अर्जन पदाधिकारी और एसएसबी,वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। सभी एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने, संयुक्त गश्त और खुफिया तंत्र को सक्रिय रखने पर विशेष बल दिया गया।
विश्लेषकों के अनुसार इस पूरी कवायद का स्पष्ट संदेश है कि बिहार सरकार अब सीमा सुरक्षा को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि संगठित अपराध, तस्करी और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी व्यापक चुनौती के रूप में देख रही है। रक्सौल बैठक के बाद यह तय माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारत-नेपाल सीमा पर निगरानी, कार्रवाई और समन्वय—तीनों स्तरों पर अभूतपूर्व सख्ती देखने को मिलेगी।
