Thursday, April 23

भारत-नेपाल आर्थिक सहयोग मंच 2026: द्विपक्षीय व्यापार और साझा समृद्धि के नए अध्याय की शुरुआत


​वीरगंज।(Vor desk)। भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने संबंधों को अब एक ठोस आर्थिक धरातल पर लाने के लिए वीरगंज में “भारत–नेपाल आर्थिक सहयोग मंच 2026” का भव्य आयोजन किया गया। “साझा समृद्धि के लिए द्विपक्षीय सहयोग को तीव्रता” के मूल मंत्र के साथ आयोजित इस फोरम ने दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक नई रूपरेखा प्रस्तुत की है।
​इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के भारत–नेपाल केंद्र द्वारा कॉन्फेडरेशन ऑफ नेपलीज इंडस्ट्रीज (CNI) और बारा पर्सा उद्योग संघ (BPUS) के समन्वय से किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य वीरगंज–रक्सौल जैसे रणनीतिक सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति देना और व्यापारिक बाधाओं को दूर करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स, दिल्ली के वरिष्ठ सचिव अतुल कुमार ठाकुर ने की, जबकि CNI (मधेश प्रदेश) के अध्यक्ष प्रमोद कुमार साह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए औद्योगिक साझेदारी की महत्ता पर जोर दिया।
​चर्चा के दौरान नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ (FNCCI) के पूर्व अध्यक्ष (मधेश प्रदेश) अशोक टेमानी ने एक कड़ा और व्यवहारिक पक्ष रखते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच “रोटी-बेटी” का रिश्ता केवल भावुक नारा बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे ठोस आर्थिक लाभ और औद्योगिक विकास में बदलना अनिवार्य है। उन्होंने सीमा पार व्यापार को सुगम बनाने के लिए डिजिटल प्रणालियों के विस्तार, बेहतर सीमा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे में आमूलचूल सुधार की वकालत की। इसी क्रम में CNI के महानिदेशक डॉ. घनश्याम ओझा ने द्विपक्षीय निवेश की संभावनाओं पर तकनीकी प्रकाश डाला।
​इस उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय कूटनीति और व्यापार जगत का भी प्रतिनिधित्व रहा, जिसमें वीरगंज स्थित भारतीय महावाणिज्यदूत देवी सहाय मीना मुख्य अतिथि के रूप में और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव (वाणिज्य) सुमन शेखर विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए। साथ ही वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष हरि प्रसाद गौतम और चितवन उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष सुमन श्रेष्ठ ने भी अपने सुझाव साझा किए।
​फोरम के दौरान रेमिटेंस (प्रेषण), आयात-निर्यात व्यवस्था में नीतिगत सुधार, क्लस्टर आधारित आर्थिक विकास और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने जैसे विषयों पर गहन मंथन हुआ। समापन पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि भारत और नेपाल के बीच दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी तभी सफल होगी जब औद्योगिक विकास के साथ-साथ सड़क, रेल और हवाई संपर्क को और अधिक आधुनिक बनाया जाए। सम्मेलन में उम्मीद जताई गई कि यह आयोजन दोनों देशों के निजी और सरकारी क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा ।(रिपोर्ट: पीके गुप्ता)

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