Sunday, June 7

अकीदत और सौहार्द के साथ रक्सौल में अदा की गई अलविदा जुमे की नमाज, अमन-चैन के लिए उठे हजारों हाथ

रक्सौल (V.O.R. desk): सीमावर्ती शहर रक्सौल की बड़ी मस्जिद में शुक्रवार को रमजान के पवित्र महीने के अंतिम जुमे यानी ‘अलविदा जुम्मा’ की नमाज पूरे अकीदत और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। इस विशेष अवसर पर हजारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मस्जिद परिसर के साथ-साथ मुख्य सड़क तक कतारबद्ध होकर खुदा की इबादत की। नमाज के दौरान विशेष रूप से देश में अमन-चैन, आपसी भाईचारा और तरक्की के लिए सामूहिक दुआएं मांगी गईं। जैसे ही नमाज संपन्न हुई, शहर में शनिवार को मनाई जाने वाली ईद-उल-फितर की तैयारियां और भी तेज हो गईं तथा चारों ओर शुभकामनाओं के आदान-प्रदान का सिलसिला शुरू हो गया।

​इस महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन को लेकर नगर परिषद और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। नगर परिषद द्वारा मस्जिद के आसपास और मुख्य सड़कों पर विशेष साफ-सफाई की व्यवस्था की गई थी, ताकि नमाजियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सुरक्षा के दृष्टिकोण से अनुमंडल प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम किए थे। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर पुलिस पदाधिकारियों और दंडाधिकारियों की तैनाती की गई थी, जिससे नमाज के दौरान विधि-व्यवस्था और यातायात सुचारू बना रहा।

​नमाज के बाद मस्जिद के इमाम ने रमजान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पूरे 30 दिनों के रोजे और संयम के बाद अलविदा जुमे की नमाज का एक विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है। यह दिन त्याग और समर्पण का प्रतीक है, जहाँ खुदा से पूरी मानवता के कल्याण की प्रार्थना की जाती है। इस दौरान हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों ने अनुशासन और धैर्य का परिचय देते हुए नमाज अदा की।

​कार्यक्रम का सबसे खूबसूरत पहलू वह दिखा जब नमाज के बाद हिंदू समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में मस्जिद के पास पहुंचे और अपने मुस्लिम भाइयों को गले लगाकर ईद की अग्रिम मुबारकबाद दी। सामाजिक एकता और कौमी एकता की मिसाल पेश करते हुए दोनों समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशियाँ साझा कीं। इस दृश्य ने रक्सौल की साझा संस्कृति और ऐतिहासिक सौहार्द को और भी मजबूती प्रदान की।

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