
भ्रामक सूचनाओं को त्याग कर तथ्यपरक पत्रकारिता अपनाएं पत्रकार: वीरगंज विचार गोष्ठी में विशेषज्ञों का आह्वान
वीरगंज।(Vor desk)। नेपाल और भारत के बीच सदियों पुराने प्रगाढ़ संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के लिए मीडिया को अपनी भूमिका कूटनीति से आगे बढ़कर ‘जन-संवाद’ के रूप में निभानी होगी। शुक्रवार को वीरगंज के टाउनहॉल में ‘नेपाल–भारत संबंधों में मीडिया की भूमिका’ विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में सीमा पार के विशेषज्ञों और राजनेताओं ने यही साझा स्वर बुलंद किया।
रोटी-बेटी के रिश्तों पर न पड़े कूटनीति का साया

गोष्ठी के मुख्य अतिथि मधेश प्रदेश के भूमि व्यवस्था, कृषि एवं सहकारी मंत्री श्याम बाबू पटेल ने कहा कि नेपाल-भारत के रिश्ते केवल फाइलों और मेज पर होने वाले समझौतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक नींव पर टिके हैं। उन्होंने चिंता जताई कि अब सीमावर्ती क्षेत्रों पर दिल्ली और काठमांडू की नीतियों का प्रभाव अधिक दिखने लगा है, जबकि प्राथमिकता हमारे साझा ‘रोटी-बेटी’ के रिश्तों को मिलनी चाहिए। उन्होंने मीडिया से अपील की कि सीमा क्षेत्र की समस्याओं पर पैनी नजर रखते हुए मर्यादित पत्रकारिता करें।
नेचुरल बॉन्डिंग को बचाना जरूरी: अजय द्विवेदी
संविधान सभा सदस्य अजय द्विवेदी ने कहा कि दोनों देशों का रिश्ता प्राकृतिक है। हालांकि, वर्तमान में आपसी मैत्री संबंधों में आई कमी चिंता का विषय है। ‘पीपुल्स टू पीपुल्स रिलेशन’ (जन-जन का संबंध) कमजोर न हो, इसके लिए मीडिया को सेतु की तरह काम करना होगा।
पत्रकारों के लिए साझा संवाद तंत्र की मांग
हरिहर विरही (पूर्व अध्यक्ष, नेपाल पत्रकार महासंघ) एवं शिव लम्साल (अध्यक्ष, प्रेस यूनियन) ने कहा कि मीडिया का काम केवल समाचार देना नहीं, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों के बीच विश्वास पैदा करना है।
वहीं,बाला भास्कर (राष्ट्रीय अध्यक्ष, IMJU, भारत) ने सीमावर्ती पत्रकारों के लिए एक ‘साझा संवाद तंत्र’ (Shared Communication Network) विकसित करने की जरूरत पर बल दिया।
दीपेंद्र चौहान (वरिष्ठ पत्रकार एवं संयुक्त सचिव, विश्व पत्रकार महासंघ) ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने सीमा क्षेत्र में पत्रकारों की सुरक्षा चुनौतियों और सोशल मीडिया के दौर में भ्रामक खबरों से बचने की सलाह दी।
प्रमुख उपस्थिति और सम्मान
कार्यक्रम में चंपारण प्रेस क्लब के ज्ञानेश्वर गौतम, वरिष्ठ पत्रकार मुनेश राम, दीपक अग्निरथ और अनुज दास ने आपसी समन्वय पर जोर दिया। साथ ही आम संचार प्राधिकरण के अध्यक्ष जितेन्द्र खड़का, श्याम बंजारा, ओम प्रकाश खनाल, सिकंदर पासवान और तबरेज अहमद ने भी अपने विचार रखे।

सम्मान: इस अवसर पर भारत के विभिन्न राज्यों से आए 20 से अधिक पत्रकारों को नेपाली सांस्कृतिक पहचान की प्रतीक ‘ढाका टोपी’ पहनाकर और ‘टोकन ऑफ लव’ भेंट कर सम्मानित किया गया, जो दोनों देशों के बीच सौहार्द का प्रतीक बना।
