Friday, April 24

जोर पकड़ रहा है रक्सौल को जिला बनाने की मांग,मुख्यमंत्री से है उम्मीद,क्योंकि,उन्होंने पहले भी दिया था आश्वासन!

रक्सौल।(Vor desk)। रक्सौल को जिला बनाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है।विधान सभा चुनाव में यह मुद्दा गर्म हो गया है।पूछा जा रहा है कि क्या हुआ तेरा वादा,वो कसम वो इरादा..?पूर्व में जन प्रतिनिधियों ने जिला बनवाने का वायदा तो जरूर किया,लेकिन,पूरा नहीं हुआ।लेकिन, रक्सौल वासियों ने जिला की उम्मीद नहीं छोड़ी है।नारा दिया गया है कि जो रक्सौल को जिला बनाने का बात करेगा वही रक्सौल पर राज करेगा।
इसको ले कर कई बार बिहार मुख्य मंत्री नीतीश कुमार को ज्ञापन भी सौंपा जा चुका है।लोक सभा चुनाव के समय भेलाही में आयोजित चुनावी सभा में भी ज्ञापन सौप कर जोर शोर से मांग किया गया था कि रक्सौल को जिला बनाया जाए।जिस पर मुख्य मंत्री ने इशारों में सकारात्मक संकेत दिए।स्थानीय जन प्रतिनिधियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि भारत नेपाल सीमा पर अवस्थित रक्सौल शहर काफी विकसित शहर है।जिला बनने की सभी अर्हता पूरी करता है।इसकी जिला मुख्यालय से दूरी करीब60किलो मीटर है,जिससे जिला मुख्यालय आने जाने में काफी कठिनाई होती है।पूर्व में भी विभिन्न राजनीतिक दलो और जन प्रतिनिधियों के द्वारा रक्सौल को जिला बनाने की मांग होती रही है।

बता दे कि अंतरराष्ट्रीय महत्व के रक्सौल की पहचान देश-विदेश में गेटवे ऑफ नेपाल के रूप में है। आयात-निर्यात को लेकर आर्थिक नगरी के रूप में ख्याति प्राप्त है। रक्सौल को जिला बनाने की मांग लंबे अर्से से उठती रही है।वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ और नेपाल भारत सहयोग मंच भी कई बार जिला बनाने पर जोर दे चुका है।

पूर्व में वर्ष 2004 में जब पूर्व मंत्री रघुनाथ झा यहां से चुनाव लडे तो उन्होंने रक्सौल को जिला का दर्जा दिलाने का वायदा किया और नारा दिया कि मेरे पैरो में घुंघुरू बांध दे,तो,मेरी चाल देख ले।लेकिन,यह मांग पूरी नहीं हुई। पूर्व राज्य सभा सांसद साबिर अली सहित अन्य ने भी जोर शोर से इस मुद्दे को उठाया था।इसको ले कर पूर्व में नीतीश सरकार ने इस दिशा में पहल जरूर की। तिरहुत प्रमंडल के कमिश्नर ने इस बारे में रिपोर्ट भी भेजी थी। सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2014 में अनुमंडल प्रशासन की रिपोर्ट के बाद पूर्वी चंपारण के छेंगराहा की सभा में इसे जिला घोषित करने की तैयारी भी हो गई थी,लेकिन, बनते बिगड़ते समीकरण के कारण ऐसा नहीं हो सका था। तब से रक्सौल वासी रक्सौल को जिला बनाने का बाट जोह रहे हैं।यह सपना आज तक पूरा नहीं हो सका। भौगोलिक स्थिति भी रक्सौल जिला के लिए अनुकूल है। रक्सौल चार प्रखंडों का अनुमंडल है। इस अनुमंडल में पलनवा एक प्रस्तावित प्रखंड है। रक्सौल प्रखंड और रक्सौल नगर परिषद की ओर से पूर्व में सर्वसम्मत प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जा चुका है।भेलाही की सभा में मुख्य मंत्री नितीश कुमार ने कहा था कि जो लोग मांग करता है कि नाम बदलना चाहिए, ऊ सब होगा।चिंता मत करिए।इशारे में उन्होंने कहा कि अभी त हम लोग बहुत तरह का जांच ऊच करवा के रखे हुए हैं।
आगे हम लोगो को मौका मिलेगा त इस सब काम करवा देंगे,चिंता मत करिएगा।

जन प्रतिनिधियों की चुप्पी और सांगठनिक जिला पर सवाल

रक्सौल में सत्तारूढ़ राजनीतिक दल भाजपा सहित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ,विहिप ने यहां सांगठनिक जिला रक्सौल खड़ा कर लिया है,लेकिन, रक्सौल को पूर्ण और राजस्व जिला बनाने के मामले में उनकी चुप्पी बनी रहती है।कभी मुखरता से इस बारे में पहल नहीं की गई।यहां तक कि क्षेत्रीय सांसद और विधायक की ओर से भी जोरदार पहल नहीं हो सकी है।

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